राष्ट्र प्रथम के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सर्वोच्च बलिदान दिया, उनके आदर्शों पर चलना हर कार्यकर्ता का दायित्व : गणेश मिश्रा

राष्ट्र प्रथम के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सर्वोच्च बलिदान दिया, उनके आदर्शों पर चलना हर कार्यकर्ता का दायित्व : गणेश मिश्रा

डॉ. मुखर्जी के 125वें स्मरण पक्ष पर भाजपा का कार्यकर्ता सम्मेलन, जयंती पर हर बूथ पर माल्यार्पण का आह्वान

डीजे न्यूज, गिरिडीह : भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यालय हरिचक में शनिवार को भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 125वें स्मरण पक्ष के तहत कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में पार्टी के प्रदेश महामंत्री गणेश मिश्रा ने कार्यकर्ताओं को डॉ. मुखर्जी के विचारों और राष्ट्रवादी दर्शन से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि “राष्ट्र प्रथम के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके आदर्शों पर चलना हर कार्यकर्ता का दायित्व है।”

कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष रंजीत कुमार राय ने की। मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश महामंत्री गणेश मिश्रा उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन जिला के पूर्व उपाध्यक्ष श्याम प्रसाद ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन जिला मंत्री सुरेश मंडल ने किया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में जिलाध्यक्ष रंजीत कुमार राय ने कहा कि रविवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर जिले के सभी बूथों पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए जाएंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से पार्टी के सरल ऐप के डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने तथा प्रशिक्षण प्राप्त करने का आह्वान किया। साथ ही गिरिडीह जिला महानगर को संगठन की ओर से दिए गए लक्ष्य को हर हाल में पूरा करने का निर्देश भी दिया।

मुख्य अतिथि गणेश मिश्रा ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन संघर्ष पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र सेवा को समर्पित रहा। उन्होंने कहा, “राष्ट्र प्रथम उनका मूल मंत्र था। देश की एकता और अखंडता के लिए उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। एक साजिश के तहत कश्मीर में उनकी हत्या हुई। आज उनके 125वें स्मरण पक्ष पर हम सभी उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लेते हैं।”

मिश्रा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने पद और सत्ता की कभी परवाह नहीं की। केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए भी उन्होंने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में ‘दो संविधान, दो निशान और दो प्रधान’ की व्यवस्था का खुलकर विरोध किया। वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना कर उन्होंने वैचारिक राजनीति की नई धारा को जन्म दिया।

उन्होंने अपने संबोधन में नेहरू-लियाकत समझौते का भी विस्तार से उल्लेख किया। साथ ही बताया कि डॉ. मुखर्जी के नेतृत्व में पहली बार जनसंघ ने चुनाव लड़ा, जिसमें पार्टी को तीन सीटों पर जीत मिली। उन्होंने जनसंघ के दौर से लेकर भारतीय जनता पार्टी की स्थापना और तीन सीटों से देश की सत्ता तक पहुंचने के पूरे राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं से संगठन की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में पूर्व विधायक जयप्रकाश वर्मा, जिला परिषद अध्यक्ष मुनिया देवी, पूर्व डिप्टी मेयर प्रकाश सेठ, पूर्व जिला अध्यक्ष यदुनंदन पाठक, बार एसोसिएशन के महासचिव चुन्नूकांत, कोडरमा सांसद प्रतिनिधि दिनेश यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष महिला मोर्चा विनिता कुमारी, इंजीनियर विनय सिंह, जिला महामंत्री संदीप डंगाइच, जिला उपाध्यक्ष नवीन सिन्हा एवं संगीता सेठ, जिला मंत्री दीपक यादव, रिंकी देवी, डॉ. शैलेंद्र चौधरी, सुबोध कांत, सदानंद राम, सुनित सिंह, निर्भय सिंह, मिथुन चंद्रवंशी, राजेश जायसवाल, अमर सिंह, सुमन सिन्हा, ज्योतिश शर्मा, मंडल अध्यक्ष खिरोधर दास, अजय सिंह, सोमनाथ पांडेय, राजेश गुप्ता, जयशंकर सिन्हा, सिंकु, कुंदन सिंह, मनोज पांडेय, जयप्रकाश वर्मा, हरेंद्र सिंह, अरविंद चंद्र राय, बबली साहू, राजेश वर्मा सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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