पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणालियों का एकीकरण विषय पर आयोजित प्रशिक्षण शिविर का समापन‌ अध्यापन, शोध और अकादमिक कार्य में लागू करने का लिया संकल्प

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पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणालियों का एकीकरण विषय पर आयोजित प्रशिक्षण शिविर का समापन‌

अध्यापन, शोध और अकादमिक कार्य में लागू करने का लिया संकल्प

डीजे न्यूज, धनबाद: मदन मोहन मालवीय शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र/मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र के तत्वावधान में आइआइटी-आइएसएम धनबाद में पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणालियों (IKS) का एकीकरण विषय पर आयोजित छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शनिवार को हुआ। कार्यक्रम में देश के विभिन्न भागों से आए प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के सचिव प्रो. मनीष आर. जोशी रहे। इस अवसर पर प्रो. मृणालिनी पांडेय, प्रमुख, एमएमएमटीटीसी; प्रो. कृष्णेंदु शॉ, कार्यक्रम समन्वयक सहित संस्थान के शिक्षकगण, प्रतिभागी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि प्रो. मनीष आर. जोशी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सहभागिता, संवाद और आत्म-अभिव्यक्ति भारत की नई शैक्षणिक व कॉर्पोरेट आकांक्षाओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पूर्व जिन विषयों पर चर्चा नहीं होती थी, आज वे शैक्षणिक विमर्श के केन्द्र में हैं, जो देश की बदलती सोच और बढ़ती आकांक्षाओं को दर्शाता है।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप UGC द्वारा पाठ्यक्रम ढांचे (Curriculum Framework) पर किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि UGC ने विभिन्न विषयों के लिए रूपरेखा तैयार कर उसे सार्वजनिक डोमेन/वेबसाइट पर साझा किया है। उन्होंने बताया कि इस ढांचे में विषयों को पहली बार अंतर्विषयी (Interdisciplinary) दृष्टिकोण से पढ़ाने पर जोर दिया गया है तथा यह भी सुनिश्चित किया गया है कि प्रत्येक विषय में भारतीय परंपरा और हमारे पूर्वजों के योगदान को शामिल किया जाए—चाहे वह मानवविज्ञान, वाणिज्य, रसायन, फोटोग्राफी या अन्य कोई विषय हो।
उन्होंने आगे कहा कि विषय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, अन्य विषयों के साथ एकीकरण, नए विचारों को अपनाने की क्षमता और शिक्षण-पद्धति (Pedagogy) जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को पाठ्यक्रम ढांचे में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम का उद्देश्य केवल विषय पढ़ाना नहीं बल्कि विषय को समग्रता में समझना है, जो भारतीय ज्ञान-परंपरा की मूल विशेषता रही है।
प्रो. जोशी ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना करते हुए आयोजक टीम को धन्यवाद दिया और कहा कि ऐसे कार्यक्रम आयोजित करना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन MMMTTC की टीम ने इसे अत्यंत व्यवस्थित और सफल ढंग से संपन्न किया। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे IKS से प्राप्त अवधारणाओं को अपने अध्यापन, शोध और अकादमिक कार्य में लागू करने का संकल्प लें, ताकि यह परंपरा आगामी पीढ़ियों तक पहुंचे।
समापन सत्र में कार्यक्रम समन्वयक प्रो. कृष्णेंदु शॉ ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा एक व्यापक “इकोसिस्टम” के रूप में विकसित हुई है, जिसमें जीवन के मूल स्तंभों—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—का समावेश है। उन्होंने कहा कि IKS को पश्चिमी एवं अन्य वैश्विक ज्ञान-परंपराओं के साथ समन्वय कर त्रिकोणीय दृष्टिकोण (Triangulation approach) के माध्यम से बेहतर निर्णय और समग्र विकास की दिशा में उपयोग किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि छह दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन किया, और प्रतिभागियों ने पूरे धैर्य, रुचि और प्रतिबद्धता के साथ सत्रों में भाग लिया। उन्होंने MMMTTC टीम के सहयोग और उत्कृष्ट आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया।
प्रो. मृणालिनी पांडेय, प्रमुख MMMTTC ने स्वागत एवं समापन सत्र में कार्यक्रम की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।
उल्लेखनीय है कि 6-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान IKS अवधारणा, पाठ्यक्रम विकास, IKS पेडागॉजी, गणित-खगोल, रसायन, वास्तुकला, धातुकर्म, कृषि, आयुर्वेद, जल प्रबंधन, योग, अर्थशास्त्र, नीति शास्त्र सहित अनेक विषयों पर सत्र आयोजित किए गए।

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