मोबाइल फॉरेंसिक्स एवं मोबाइल डिजिटल साक्ष्य पर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित

मोबाइल फॉरेंसिक्स एवं मोबाइल डिजिटल साक्ष्य पर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित

 

डीजे न्यूज, धनबाद: पुलिस अधिकारियों एवं अनुसंधानकर्ताओं की तकनीकी दक्षता बढ़ाने तथा आपराधिक मामलों के अनुसंधान में डिजिटल साक्ष्यों के वैज्ञानिक उपयोग को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सोमवार को समाहरणालय स्थित पुलिस सभागार में विधि विज्ञान एवं डिजिटल फॉरेंसिक्स से संबंधित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के चौथे सत्र का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण के दौरान मोबाइल फॉरेंसिक्स एवं मोबाइल उपकरणों से प्राप्त होने वाले डिजिटल साक्ष्यों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण सत्र की अध्यक्षता ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने की। इस अवसर पर डीएसपी विधि व्यवस्था प्रकाश सोय, डीएसपी साइबर प्रदीप कुमार साव समेत विभिन्न पुलिस पदाधिकारी एवं अनुसंधानकर्ता उपस्थित रहे। सत्र के दौरान प्रशिक्षक सुयश भारती ने मोबाइल फॉरेंसिक्स और डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित विभिन्न तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।

मोबाइल डिजिटल साक्ष्य की पहचान और संरक्षण पर जोर

प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि वर्तमान समय में मोबाइल फोन आपराधिक घटनाओं के अनुसंधान में महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य का स्रोत बन चुके हैं। मोबाइल उपकरणों में मौजूद विभिन्न प्रकार के डेटा को सही तरीके से पहचानना, सुरक्षित रखना और वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत उसका परीक्षण करना जांच की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पुलिस पदाधिकारियों को मोबाइल डिजिटल साक्ष्य की पहचान, संरक्षण, अधिग्रहण, परीक्षण एवं विश्लेषण की पूरी प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी गई। इस दौरान यह भी समझाया गया कि किसी मोबाइल उपकरण से प्राप्त डिजिटल साक्ष्य को किस प्रकार सुरक्षित रखा जाए ताकि उसकी मौलिकता एवं विश्वसनीयता प्रभावित न हो और आवश्यकता पड़ने पर उसे न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

एंड्राइड और iOS डिवाइस से प्राप्त साक्ष्यों की जानकारी

प्रशिक्षण में एंड्राइड एवं iOS आधारित मोबाइल उपकरणों से प्राप्त होने वाले विभिन्न प्रकार के डिजिटल साक्ष्यों और उनके फॉरेंसिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को बताया गया कि अलग-अलग ऑपरेटिंग सिस्टम और डिवाइस में डेटा के स्वरूप, उपलब्धता और संरक्षण की प्रक्रिया अलग हो सकती है। ऐसे में अनुसंधानकर्ताओं को तकनीकी पहलुओं की जानकारी होना आवश्यक है।

मोबाइल से मिलने वाले महत्वपूर्ण डिजिटल आर्टिफैक्ट्स

प्रशिक्षण के दौरान मोबाइल फोन से प्राप्त होने वाले विभिन्न डिजिटल आर्टिफैक्ट्स की भी विस्तृत जानकारी दी गई। इनमें सिम एवं डिवाइस से संबंधित जानकारी, कॉल लॉग, मैसेज एवं चैट, कॉन्टैक्ट, फोटो एवं वीडियो, लोकेशन संबंधी डेटा, ब्राउजर हिस्ट्री तथा विभिन्न एप्लिकेशन से संबंधित डेटा शामिल हैं।

बताया गया कि किसी मामले के अनुसंधान में इन डिजिटल आर्टिफैक्ट्स को आपस में जोड़कर घटना से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों और परिस्थितियों की पुष्टि करने में सहायता मिल सकती है। मोबाइल में उपलब्ध डेटा किसी व्यक्ति की गतिविधियों, संपर्कों, संचार और घटनाक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग उपलब्ध करा सकता है।

मोबाइल डेटा अधिग्रहण की विभिन्न विधियों पर व्यावहारिक चर्चा

प्रशिक्षण सत्र में मोबाइल डेटा अधिग्रहण की विभिन्न विधियों के बारे में भी जानकारी दी गई। अनुसंधान के उद्देश्य, मोबाइल डिवाइस की स्थिति और उपलब्ध डिजिटल डेटा के आधार पर उपयुक्त प्रक्रिया का चयन कैसे किया जाए इस पर व्यावहारिक चर्चा की गई।

पुलिस अधिकारियों को इस बात की जानकारी दी गई कि मोबाइल उपकरण से डिजिटल डेटा प्राप्त करते समय निर्धारित वैज्ञानिक प्रक्रिया एवं सावधानियों का पालन करना आवश्यक है ताकि मूल डेटा की अखंडता प्रभावित न हो और प्राप्त साक्ष्य की विश्वसनीयता बनी रहे।

व्हाट्सएप और सोशल मीडिया डेटा के फॉरेंसिक महत्व की जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान व्हाट्सएप एवं अन्य मैसेजिंग और सोशल मीडिया एप्लिकेशन से संबंधित डिजिटल साक्ष्यों पर भी विशेष चर्चा की गई। चैट, मीडिया फाइल, संपर्क संबंधी जानकारी तथा उपलब्ध अन्य डिजिटल आर्टिफैक्ट्स का आपराधिक अनुसंधान में किस प्रकार फॉरेंसिक महत्व हो सकता है इसकी जानकारी दी गई।

विशेषज्ञ ने समझाया कि डिजिटल संचार से प्राप्त जानकारी का मूल्यांकन करते समय उसके स्रोत, समय, संदर्भ और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के साथ उसके संबंध को ध्यान में रखना आवश्यक है।

डिजिटल साक्ष्य की अखंडता और दस्तावेजीकरण पर विशेष जोर

प्रशिक्षण में मोबाइल साक्ष्यों की अखंडता, संरक्षण, दस्तावेजीकरण और विश्लेषण के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को बताया गया कि डिजिटल साक्ष्य अत्यंत संवेदनशील प्रकृति के होते हैं और इनके साथ किसी भी स्तर पर अनावश्यक छेड़छाड़ या गलत प्रक्रिया अपनाने से साक्ष्य की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

इसलिए मोबाइल डिवाइस को साक्ष्य के रूप में प्राप्त करने से लेकर उसके संरक्षण, अधिग्रहण, परीक्षण और विश्लेषण तक प्रत्येक चरण का उचित दस्तावेजीकरण और वैज्ञानिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।

वैज्ञानिक अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा

प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों एवं अनुसंधानकर्ताओं को मोबाइल उपकरणों से प्राप्त डिजिटल साक्ष्यों के वैज्ञानिक, तकनीकी एवं साक्ष्य-आधारित उपयोग की व्यावहारिक समझ प्रदान करना रहा। प्रशिक्षण के माध्यम से अनुसंधानकर्ताओं को आधुनिक तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल, डिजिटल साक्ष्यों की बेहतर पहचान तथा उनके वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए आवश्यक जानकारी दी गई।

ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने कहा कि बदलते अपराध के स्वरूप में डिजिटल साक्ष्य की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पुलिस अनुसंधान को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनाने तथा डिजिटल साक्ष्यों के माध्यम से मामलों के अनुसंधान को मजबूत करने के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम महत्वपूर्ण हैं।

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