मजदूर एवं किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष होगा तेज: सीटू

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मजदूर एवं किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष होगा तेज: सीटू

डीजे न्यूज, रांची: सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) ने संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आहूत 16 जनवरी को ‘*अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस’* को अपना पूरा समर्थन दिया है। सीटू ने देश भर के मज़दूरों से इस दिन किसानों के साथ एकजुटता दिखाते हुए सड़कों पर उतरने का आह्वान किया है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने बीज विधेयक 2025, मसौदा बिजली (संशोधन) विधेयक 2025, विकसित भारत जी राम जी अधिनियम 2025 एवं चार श्रम संहिताओं  के खिलाफ तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य , कर्ज माफी , भूमि अधिग्रहण अधिनियम (एल ए आर आर )-2013 को प्रभावी ढंग से लागू करने की अपनी मांगों के समर्थन में 16 जनवरी को गांवों और ब्लॉक स्तर पर प्रतिरोध दिवस मनाने का फैसला किया है। इन जायज़ मांगों के समर्थन में पूरे राज्य में संयुक्त कार्रवाई में सीटू हिस्सा लेगी।
सीटू का तरफ से यह बताया गया कि विकसित भारत जी राम जी अधिनियम के तहत ‘मांग-आधारित’ मॉडल को बदलकर ‘बजट-सीमा’ में तब्दील करने से रोजगार की गारंटी समाप्त होने का खतरा है। मजदूरी के लिए 60:40 का नया फंडिंग फॉर्मूला  राज्यों पर भारी बोझ डालेगा, जिससे कर्म दिवस में कटौती हो सकती है। खेती के व्यस्त समय के दौरान 60 दिनों का अनिवार्य कार्य अवकाश भूमिहीन मजदूरों और महिलाओं के लिए संकट पैदा करेगा, जो इसी योजना पर निर्भर रहते हैं। तकनीकी निर्भरता उन मजदूरों को बाहर कर सकती है जिनके पास डिजिटल साक्षरता नहीं है या जहाँ इंटरनेट की सुविधा खराब है। ग्राम सभाओं की भूमिका कमजोर होगी और स्थानीय योजना बनाने की शक्ति केंद्र के पास चली जाएगी। बेरोजगारी भत्ते और मजदूरी में देरी के मुआवजे से जुड़े अनिवार्य प्रावधानों को भी कमजोर किया गया है। योजना के नाम से “महात्मा गांधी” का नाम को हटाना सामाजिक न्याय और ‘सर्वोदय’ की विरासत को मिटाने के वैचारिक प्रयास है।
सरकार ने  बीज विधेयक , 2025 पेश किया है, जिसमें किसानों के लिए मुआवजे की कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसके साथ ही बिल के प्रावधानों के अनुसार, पारंपरिक बीजों के संरक्षण और साझा करने की परंपरा तथा स्वदेशी किस्मों, जैव-सुरक्षा एवं बीज की कीमतों पर  प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
इसी तरह पेश किया गया बिजली संशोधन बिल -2025 के प्रावधानों के तहत क्रॉस-सब्सिडी का उन्मूलन के कारण गरीब एवं एमएसएमई उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा , कार्यरत कर्मचारियों का रोजगार और सार्वजनिक बिजली क्षेत्र पर विनाशकारी प्रभाव बढ़ने के साथ-साथ निजी कंपनियों के घाटे का राष्ट्रीयकरण का रास्ता भी प्रशस्त होगा।
इन तीनों बिलों के तहत राज्यों के अधिकारों और संघवाद की अवधारणा पर बुरा असर पड़ेगा।
इस पृष्ठभूमि में, ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार के जन-विरोधी, किसान-विरोधी और मजदूर-विरोधी रुख को उजागर करने के लिए व्यापक जनसंपर्क करने का निर्णय लिया है।  संघर्ष के अगली कड़ी में संयुक्त किसान मोर्चा की एकजुटता के साथ, 12 फरवरी को मजदूरों की ‘राष्ट्रीय आम हड़ताल’ होगी।

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