मौलिक भूमि सुधार से ही कृषि संकट की समस्या हल होगी : हन्नान मोल्ला

मौलिक भूमि सुधार से ही कृषि संकट की समस्या हल होगी : हन्नान मोल्ला

सीपीआई (एम) का दो दिवसीय शिक्षण शिविर शुरू

डीजे न्यूज, जामताड़ा:
ब्रिटिश शासकों ने कई प्रकार के कानून बनाकर जमीन ज़मींदारों के हवाले कर दिया। जमींदार किसानों और रैयतों से भारी मात्रा में लगान वसुलते और उसका एक हिस्सा ब्रिटिश सरकार को देते थे। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में ही 1936 में अखिल भारतीय किसान सभा की स्थापना हुई जिसने स्थापना काल से ही जमींदारी खत्म किए जाने की मांग की थी। देश के आजादी के बाद जमींदारी प्रथा को खत्म किए जाने की घोषणा की गई , लेकिन भू स्वामियों ने सिलिंग बनाकर भूमि के अधिकांश हिस्से पर कब्जा बरकरार रखा। आज़ादी के बाद भी इसी वर्ग का राजनीतिक- सामाजिक प्रभुत्व रहा है। आज कृषि संकट के लिए यही वर्ग जिम्मेवार है क्योंकि अपने वर्गीय प्रभुत्व को कायम रखने के लिए यही वर्ग मौलिक भूमि सुधार लागू नहीं होने देना चाहता है।
यह बात शुक्रवार को सीपीआई (एम) के राज्य स्तरीय शिक्षण सत्र में कृषि संकट और खाद्य सुरक्षा विषय पर कक्षा लेते हुए किसान आंदोलन के एक प्रमुख हस्ताक्षर हन्नान मोल्ला ने कही।  उन्होंने कृषि संकट के विभिन्न पहलुओं की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि आज भी देश में 60 प्रतिशत लोग खेती से जुड़े हुए हैं। जिनमे 30 करोड़ लोग भूमिहीन खेत मजदूर हैं। उन्होंने कृषि संकट के लिए मोदी सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते पिछले दिनों हुए एतिहासिक किसान आंदोलन का उदाहरण दिया की किस प्रकार किसान विरोधी तीन काले कानूनों को वापस लेने के लिए मोदी सरकार को मजबूर किया गया।  लेकिन मोदी सरकार कार्पोरेट घरानों के हित में अब कृषि के उत्पादन को भी नियंत्रित कर रही है। भारतीय खाद्य निगम के गोदामों की जगह कार्पोरेट अडानी के गोदाम अनाज सहित अन्य उत्पादों को रखेंगे और अपनी मर्जी से इसका मुल्य निर्धारण करेंगे। मोदी सरकार ने मनरेगा बंद कर दिया जहां उसमें 14 करोड़ गरीब लोगों को काम मिलता था। उसकी जगह लाये गए बीबी ग्राम जी मे मात्र 6 करोड़ लोगों को ही काम मिलेगा और इसका 40 प्रतिशत राज्य सरकार को देना होगा। उन्होंने देश के मुख्य उत्पादक वर्ग किसानों और मजदूरों को एकजुट होकर इस जन विरोधी सरकार के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान किया।
शिक्षण शिविर की शुरूआत पार्टी का लाल झंडा फहराने से हुई। महात्मा गांधी की जयंती पर  आजादी के आंदोलन में  उनकी महत्वपूर्ण भूमिका और धर्मनिरपेक्ष भारत के निर्माण में उनके योगदान को याद किया गया।
शिक्षण शिविर के आयोजन के लिए बनी तैयारी समिति के संयोजक सुजीत मांजी के स्वागत वक्तव्य के बाद शिक्षा उप समिति के संयोजक डॉ. काशीनाथ चटर्जी ने  दो दिवसीय शिक्षण शिविर की समय सारणी और विषय को रखा। पार्टी के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव और शिक्षा उप समिति के प्रभारी समीर दास के संक्षिप्त संबोधन के बाद शिक्षण शिविर के मुख्य शिक्षक ने कक्षा ली। इस सत्र की अध्यक्षता सुरजीत सिन्हा ने की। शिविर का दूसरा सत्र जिसका विषय है – नवउदारवाद के दौर में बदलते रोजगार का परिदृश्य इस विषय पर कक्षा पार्टी के अखिल भारतीय सचिवालय के सदस्य और अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर युनियन के संयुक्त सचिव डॉ विक्रम सिंह लेंगे। शिविर में
पार्टी के 35 राज्य कमिटी सदस्यों के अलावा 22 जिला सचिव और जनसंगठनों के 21 नेतृत्वकारी साथियों की भागीदारी हो रही है।

Social media & sharing icons powered by UltimatelySocial
Scroll to Top