खुले पैसे की किल्लत से बाजार बेहाल, छोटे नोटों की आपूर्ति पर आरबीआई से मांगा हिसाब
डीजे न्यूज, गिरिडीह : बाजारों में ₹5, ₹10 और ₹20 के नोटों व सिक्कों की कथित कमी से आम लोगों और छोटे कारोबारियों को हो रही परेशानी का मुद्दा अब सूचना के अधिकार के जरिए उठाया गया है। सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील कुमार खंडेलवाल ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से छोटे मूल्यवर्ग के नोटों की छपाई और झारखंड में उनकी आपूर्ति का ब्योरा मांगा है। इसके लिए उन्होंने 17 अक्टूबर को आरटीआई अधिनियम, 2005 के तहत ऑनलाइन आवेदन भेजा है।
खंडेलवाल के अनुसार, पिछले कई महीनों से स्थानीय बाजारों में छोटे नोटों और सिक्कों की कमी महसूस की जा रही है। इससे रोजमर्रा की खरीदारी, खुदरा भुगतान और खुले पैसे के लेन-देन में लोगों को परेशानी हो रही है। छोटे दुकानदारों और फुटकर विक्रेताओं के लिए भी ग्राहकों को शेष राशि लौटाना चुनौतीपूर्ण बन रहा है।
**छह महीने से अधिक की अवधि का मांगा हिसाब**
आरटीआई आवेदन में 1 अप्रैल 2026 से आवेदन की तिथि तक ₹5, ₹10 और ₹20 के नोटों की माहवार छपाई का विवरण मांगा गया है। साथ ही, इस अवधि में झारखंड को भेजे गए नोटों की मूल्यवर्गवार और माहवार आपूर्ति की जानकारी भी मांगी गई है।
आवेदन में यह भी पूछा गया है कि राज्य के किन-किन बैंकों और करेंसी चेस्ट शाखाओं को कितनी मात्रा में नोट उपलब्ध कराए गए। झारखंड के लिए निर्धारित आपूर्ति और वास्तविक आपूर्ति के बीच कोई अंतर होने पर उससे संबंधित अभिलेखों और दर्ज कारणों का विवरण भी मांगा गया है।
**आधिकारिक आंकड़ों से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति**
सुनील कुमार खंडेलवाल ने आवेदन में उपलब्ध अभिलेखों, विवरणियों और रिपोर्टों की प्रमाणित प्रतियां हिंदी या अंग्रेजी में उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि छोटे मूल्यवर्ग के नोट आम लोगों के दैनिक लेन-देन का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में उनकी उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था में पारदर्शिता जरूरी है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि आरबीआई से आधिकारिक आंकड़े मिलने पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि छोटे नोटों की छपाई और झारखंड में उनकी आपूर्ति की वास्तविक स्थिति क्या है। साथ ही, बाजारों में खुले पैसे की कमी से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने का रास्ता भी साफ हो सकता है।
फिलहाल, आरटीआई आवेदन के जरिए जानकारी मांगी गई है। आरबीआई की ओर से जवाब मिलने के बाद ही छोटे मूल्यवर्ग के नोटों की छपाई और राज्य में आपूर्ति से संबंधित वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।