कांग्रेस ने 2018 के राज्यसभा चुनाव में भी बदनाम किया था : राजकुमार यादव
जब 28-28 वोट से महागठबंधन के दोनों प्रत्याशी जीत सकते थे जो झामुमो प्रत्याशी को क्यों दिलाया 30 से अधिक वोट
छोटे दलों पर आरोप लगाकर अपनी हार का ठिकरा फोड़ना कहीं से सही नहीं, बयान वापस लें कांग्रेस प्रभारी के राजू
डीजे न्यूज, गिरिडीह : राजधनवार के पूर्व विधायक एवं भाकपा माले के वरिष्ठ नेता राजकुमार यादव ने राज्यसभा चुनाव परिणाम आने के बाद प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि महागठबंधन के पर्याप्त संख्या बल रहने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को मात्र 19 वोट ही प्राप्त होना और हारने की जिम्मेवारी ईमानदारी से महागठबंधन के मुख्य दल झामुमो और कांग्रेस को स्वीकार करनी चाहिए। छोटे दलों पर आरोप लगाकर अपनी हार का ठिकरा फोड़ना कहीं से सही नहीं है।
पूर्व विधायक राजकुमार यादव ने कहा कि 28-28 मत से दोनों उम्मीदवार की जीत तय थी। उस हालत में झामुमो के उम्मीदवार को तीस से अधिक मत मिलना और तीन वोट रद होना अपने आप में आश्चर्यजनक है। सभी दलों को इसकी जांच करनी चाहिए। राजकुमार यादव ने कहा कि हमेशा जब बड़े दलों के उम्मीदवारों की हार होने के बाद छोटे दलों को बदनाम करके और उनकी साख को गिराने की साजिश की जाती है। यह सही नहीं है। बिहार में भाकपा माले ने कांग्रेस के उम्मीदवार अखलेश सिंह को जीताने का काम किया। अभी हाल के चुनाव में बिहार में राजद के उम्मीदवार को हराने का काम कांग्रेस के एक राजद के ही विधायक थे। उस समय भी भाकपा माले ईमानदारी से वोट डाला। महागठबंधन अति आत्म विश्वास के कारण और झारखंड में छोटे दलों के विधायकों और स्वयं अपने पार्टी के विधायकों और सभी पार्टी के नेताओं से विचार विमर्श नहीं करके और अपने मन से कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार देना भी हार का मुख्य कारण है। एक थैलीशाह को भाजपा ने उम्मीदवार बनाकर साफ संकेत दे दिया है कि झारखंड में भी लोट्स ऑपरेशन किया जा सकता है। माले ने सरकार से कोई लाभ का पद मंत्री से लेकर कोई पद तक नहीं लिया है। न कभी सरकार को पद के लिए दबाब बनाया है। ऐसी स्थिति में माले के खिलाफ कांग्रेस प्रभारी के द्वारा बयान देना कहीं से सही नहीं है। 2018 में भी कांग्रेस ने यही खेल खेली थी और पार्टी को बदनाम किया था। उस समय भी प्रभारी झारखंड के थे जो हरियाणा के थे। वह आज भाजपा में हैं। उन्होंने मांग की है कि कांग्रेस अपना बयान को वापस ले। भाकपा माले इस बयान की कड़ी निंदा करती है। माले सम्प्रदायिक फासीवाद के खिलाफ मजबूती से भाजपा के नीतियों के खिलाफ लड़ेगी। भाकपा माले अपनी पार्टी की ओर से भी एजेंट दिया था जिन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार को हमारे विधायकों ने वोट किया।