झारखंड के प्रवासी मजदूर भुवनेश्वर महतो की केरल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत
डीजे न्यूज, गिरिडीह : झारखंड के गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र अंतर्गत हावड़ा पंचायत के पत्थलडीहा निवासी प्रवासी मजदूर 55 वर्षीय भुवनेश्वर महतो (55 वर्ष) की गुरुवार सुबह केरल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस घटना से गांव में भी शोक का माहौल है।
भुवनेश्वर महतो अपने पीछे पत्नी शनिचरिया देवी, पुत्र रंजन कुमार (22 वर्ष), सुभाष कुमार (18 वर्ष) तथा पुत्रियां गीता कुमारी (29 वर्ष) और पूनम कुमारी (25 वर्ष) को छोड़ गए हैं। परिवार के मुखिया की मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार के भविष्य और आर्थिक स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
मुखिया प्रतिनिधि ने की मुआवजे की मांग
स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि महेश महतो ने भुवनेश्वर महतो की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने संबंधित कंपनी और सरकार से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि इस मुश्किल घड़ी में परिवार को सहारा मिल सके।
पंचायत समिति सदस्य ने जताया शोक
पंचायत समिति सदस्य उमेश महतो ने भी घटना पर दुख प्रकट करते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि परिवार के मुखिया की असमय मौत से परिजनों को अपूरणीय क्षति हुई है। सरकार और संबंधित कंपनी को परिवार की स्थिति को देखते हुए उचित मुआवजा देने की दिशा में पहल करनी चाहिए।
सिकंदर अली ने सरकार से की पलायन रोकने की अपील
प्रवासी मजदूरों के हित में लगातार आवाज उठाने वाले समाजसेवी सिकंदर अली ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रोजगार की तलाश में झारखंड के हजारों मजदूर दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर हैं। जब किसी मजदूर की मौत होती है, तो उसके परिवार को आर्थिक संकट के साथ कई सामाजिक कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से भुवनेश्वर महतो की मौत के कारणों की निष्पक्ष जांच कराने, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिलाने और प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही उन्होंने झारखंड में स्थानीय स्तर पर रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराकर मजबूरी में होने वाले पलायन को रोकने के लिए ठोस नीति बनाने की अपील की। सिकंदर अली ने कहा कि प्रवासी मजदूर केवल अपने परिवार का पेट पालने के लिए घर-गांव छोड़कर दूसरे राज्यों में जाते हैं। उनकी सुरक्षा, सम्मान और उनके परिवारों का भविष्य सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनके परिवारों के सामाजिक-आर्थिक भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। अब जरूरत है कि संबंधित कंपनी और सरकार पीड़ित परिवार की मदद के लिए आगे आएं और प्रवासी मजदूरों के हित में प्रभावी कदम उठाएं।