ढाक की थाप और शंखध्वनि से गूंजा कतरास- कोयलांचल, पालकी यात्रा के साथ हुआ नवपत्रिका आगमन
डीजे न्यूज, कतरास (धनबाद):
कतरास-कोयलांचल सहित आसपास के क्षेत्र में महासप्तमी पर शनिवार को परंपरा, आस्था और राजसी वैभव का अनूठा संगम देखने को मिला। पूरा कतरास क्षेत्र मे सुबह से ही ढाक की थाप, शंख की सुरीली गूंज और घंटियों की पावन ध्वनि से सराबोर हो उठा। इस पावन बेला पर डूमरा, कतरास के राजबाड़ी, मलकेरा, रामपुर, लकड़का, देवग्राम, भेलाटांड़, सिजुआ, जोगता में पूरे शास्त्रीय विधि-विधान के साथ नवपत्रिका (कोलाबऊ) का आगमन हुआ।
पूजा पंडालों से मां की पवित्र पालकी गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। इस भव्य पालकी यात्रा में पूजा कमेटियों के पदाधिकारियों, सदस्यों, राजपरिवार के सदस्यों के साथ-साथ सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पूजा पंडाल से लेकर तालाब घाट पर प्रमुख आचार्यों की देखरेख में अनुष्ठान की शुरुआत हुई। वहां शास्त्रों के अनुसार नवपत्रिका के सभी 9 औषधीय पौधों को एक साथ बांधकर पवित्र स्नान कराया गया। महास्नान के उपरांत नवपत्रिका स्वरूप को पारंपरिक लाल पाड़ की सूती साड़ी (लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी) पहनाकर पूरी निष्ठा के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस पावन विधि के संपन्न होने के बाद मां के इस स्वरूप को पुनः आदरपूर्वक पालकी में बैठाया गया और श्रद्धालु ढाक, घंटी तथा शंख ध्वनि के साथ संपन्न हुआ। वहीं कतरास राजबाड़ी, डुमरा राजबाड़ी में आज भी राज परिवार की देखरेख में सदियों पुरानी परंपरा और पूर्ण राजकीय विधि-विधान के साथ यह पूजा संपन्न की जाती है, जो पूरे कोयलांचल में श्रद्धा और आकर्षण का मुख्य केंद्र है। महासप्तमी के इस महापूजन के साथ ही कतरास के तमाम पंडालों के पट आम दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए गए हैं।