आरटीआई से सामने आई कथित गड़बड़ी 38 लोगों के नाम गलत तरीके से ऑनलाइन दर्ज करने का आरोप शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की

आरटीआई से सामने आई कथित गड़बड़ी

38 लोगों के नाम गलत तरीके से ऑनलाइन दर्ज करने का आरोप

शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की

डीजे न्यूज, धनबाद: जिले में ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड और जमीन की कथित फर्जी एंट्री से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। गोविंदपुर अंचल के फेलाटांड़ मौजा में ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाया गया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी के आधार पर शिकायतकर्ता रमेश राही ने आरोप लगाया है कि कई प्लॉटों की संख्या में अंतर के साथ-साथ कुछ लोगों के नाम कथित रूप से गलत तरीके से ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किए गए हैं।

शिकायत के अनुसार, फेलाटांड़ मौजा के खाता संख्या 89 में दर्ज भूमि के ऑनलाइन रिकॉर्ड की जांच के दौरान बड़ी विसंगति सामने आई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक संबंधित खाते में वास्तविक रूप से करीब 220 प्लॉट होने की बात कही जा रही है, जबकि ऑनलाइन रिकॉर्ड में 273 प्लॉट दर्ज पाए गए। इस तरह करीब 53 अतिरिक्त प्लॉट ऑनलाइन दर्ज किए जाने का आरोप है।

मामले में खाता संख्या 271 में दर्ज 4 एकड़ 10 डिसमिल भूमि को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उक्त जमीन पहले ही एक खारिज मुकदमे से संबंधित रिकॉर्ड में थी और उस पर खाता संख्या अंकित नहीं थी। इसके बावजूद कथित रूप से उसे ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड में शामिल कर दिया गया।

यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला महज रिकॉर्ड में तकनीकी त्रुटि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे जमीन के स्वामित्व, खरीद-बिक्री और भविष्य में होने वाले भूमि विवादों पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
शिकायत में वर्ष 2021 के दौरान भी कथित तौर पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक उस दौरान कई लोगों के नाम ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड में गलत तरीके से दर्ज किए गए। इसमें करीब 38 लोगों के नाम कथित रूप से गलत तरीके से जोड़े जाने की बात कही गई है।

इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन अंचल अधिकारी वंदना भारती के कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक जांच और संबंधित रिकॉर्ड की विस्तृत पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ऑनलाइन एंट्री में गड़बड़ी किस स्तर पर और किसकी जिम्मेदारी से हुई।
शिकायतकर्ता रमेश राही का कहना है कि उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों और भूमि रिकॉर्ड के आधार पर इस मामले को सामने लाया है। उनका आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में इस तरह की कथित गड़बड़ी से आम लोगों के लिए जमीन की खरीद-बिक्री और वास्तविक मालिकाना हक की पहचान करना मुश्किल हो सकता है।

उन्होंने जिला प्रशासन और राजस्व विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह भी मांग की गई है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों रिकॉर्ड का मिलान कर यह पता लगाया जाए कि कितने प्लॉटों की एंट्री में अंतर है और किन लोगों के नाम किस आधार पर ऑनलाइन दर्ज किए गए।
सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि शिकायत में जिन लोगों को कथित भूमि रिकॉर्ड गड़बड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है, उन्हीं लोगों द्वारा धनबाद की 8 लेन सड़क के समीप बिरसा मुंडा पार्क के पास कथित रूप से निर्माण कार्य शुरू किए जाने की बात कही जा रही है।
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में निर्माण स्थल की जमीन का स्वामित्व, उसका वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड, नक्शा, म्यूटेशन और निर्माण की वैधता की प्रशासनिक स्तर पर जांच जरूरी हो जाती है।

भूमि रिकॉर्ड से जुड़े मामलों में छोटी सी गड़बड़ी भी भविष्य में बड़े विवाद का कारण बन सकती है। खासकर तब, जब किसी जमीन के ऑनलाइन रिकॉर्ड में वास्तविक प्लॉट संख्या से अधिक प्लॉट दर्ज होने या ऐसे व्यक्तियों के नाम जोड़ने का आरोप हो, जिनका उस भूमि से संबंध संदिग्ध बताया जा रहा है।

ऐसे में जिला प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती मूल खतियान, रजिस्टर-II, जमाबंदी, नक्शा, म्यूटेशन रिकॉर्ड और ऑनलाइन रिकॉर्ड का आपस में मिलान कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की है।

शिकायतकर्ता रमेश राही ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार के निर्माण अथवा लेन-देन पर नजर रखी जाए, ताकि निर्दोष लोगों को जमीन विवाद में फंसने से बचाया जा सके।

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