ध्रुव की अटल भक्ति ने उन्हें ध्रुवतारा बना दिया : उज्ज्वल शांडिल्य

ध्रुव की अटल भक्ति ने उन्हें ध्रुवतारा बना दिया : उज्ज्वल शांडिल्य

डीजे न्यूज, धनबाद :जब संकल्प अडिग हो, श्रद्धा निष्कलुष हो और लक्ष्य भगवान की प्राप्ति हो, तब आयु, परिस्थिति और संसाधन कभी बाधा नहीं बनते। पाँच वर्ष के बालक ध्रुव की अटूट भक्ति इसका जीवंत उदाहरण है। जागृत मंदिर चिरागोड़ा मे तृतीय प्राण प्रतिष्ठा वार्षिकोत्सव पर आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन  कथावाचक उज्ज्वल शांडिल्य ने ध्रुव चरित्र का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि अपमान यदि ईश्वर की ओर मोड़ दे, तो वही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि का कारण बन जाता है। ध्रुव ने प्रतिशोध नहीं, बल्कि तप, त्याग और भक्ति का मार्ग चुना और भगवान श्रीहरि की कृपा से अमर ध्रुवपद प्राप्त किया।
महाराज ने कहा कि जब ध्रुव को विमाता सुरूचि ने गोद में बैठने से रोक दिया, तब उनकी माता सुनीति ने उन्हें प्रतिशोध नहीं, बल्कि भगवान की शरण में जाने की प्रेरणा दी। मार्ग में देवर्षि नारद ने ध्रुव को ॐ नमो भगवते वासुदेवाय  मंत्र का उपदेश दिया। उसी मंत्र का जप और कठोर तप करके ध्रुव ने भगवान विष्णु को प्रसन्न कर लिया।
उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्त की आयु नहीं, उसके भाव देखते हैं। ध्रुव की निष्काम भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें अचल पद प्रदान किया, जो आज भी ध्रुवतारा के रूप में समस्त जगत के लिए स्थिरता, धैर्य और अटल विश्वास का प्रतीक है। श्री शांडिल्य जी महाराज ने कहा कि जीवन में कठिनाइयाँ आएँ तो निराश होने के बजाय उन्हें आत्मबल और ईश्वर-भक्ति का अवसर समझना चाहिए। बच्चों में बचपन से ही धार्मिक संस्कार, माता-पिता का सम्मान और भगवान के नाम-स्मरण की आदत विकसित करनी चाहिए। यही संस्कार उन्हें जीवन की हर परीक्षा में सफल बनाते हैं।
कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति-रस में सराबोर रहे। भजनों और हरिनाम संकीर्तन से पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण में गूंज उठा।

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