नाथवानी की सुनामी से न लाल बच सका न हरा 

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नाथवानी की सुनामी से न लाल बच सका न हरा

इंडिया खेमा तार-तार, झामुमो के बैजनाथ राम के साथ भाजपा समर्थित निर्दलीय परिमल नाथवानी आसानी से पहुंचे राज्यसभा

 

सुखाड़ क्षेत्र में भाजपा को मिली बारिश की बूंदें, फूले नहीं समा रहे भाजपा के दिग्गज

दिलीप सिन्हा, राजनीतिक संवाददाता, देवभूमि झारखंड न्यूज, धनबाद : झारखंड में हुए राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी की सुनामी ने इंडिया गठबंधन को तार-तार कर दिया। इस सुनामी से न झामुमो और राजद का हरा झंडा बच सका और ना ही धुर वामपंथी पार्टी भाकपा माले का लाल झंडा। इंडिया गठबंधन यदि एकजुट रहता तो आसानी से झारखंड की राज्यसभा की दोनों सीटें निकाल ले जाता। कारण इस गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल था। कुल 56 सीटें थी जिसके बल पर दोनों सीटें यह गठबंधन जीत सकता था। इसके लिए दोनों प्रत्याशियों को बराबर-बराबर 28 वोट दिलाने की जरूरत थी। लेकिन परिमल नाथवानी के मैदान में उतरने के बाद जो कयास लगाया जा रहा था, वह सच साबित हुआ। बहरहाल झामुमो प्रत्याशी बैजनाथ राम सर्वाधिक 31 वोट लाकर आसानी से पहली बार राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे हैं

वहीं 28 वोट लाकर भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्यशी परिमल नाथवानी एक बार फिर राज्यसभा आसानी से पहुंच गए हैं।

परिमल नाथवानी को 30 वोट मिले थे जिनमें दो रद हो गए। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को कुल 20 वोट मिले जिसमें से एक वोट रद हो गया। इस तरह प्रणव झा को मात्र 19 वोट मिले। नाथवानी की जीत से झारखंड के भाजपा दिग्गज गदगद हैं। गदगद क्यों नहीं होंगे। झारखंड वह राज्य है जहां भाजपा का कोई जलवा काम नहीं कर रहा है। इस परिस्थिति में संख्या बल नहीं होते हुए भी नाथवानी की जीत सुखाड़ में बारिश की बंदें से कोई कम थोड़े है।

झामुमो ने अपने प्रत्याशी बैजनाथ राम को 31 वोट दिलाकर भी कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा के लिए मुश्किलें खड़ी की थी।

झामुमो प्रत्याशी को जीत के लिए मात्र 28 वोटों की जरूरत थी। झामुमो का तर्क हो सकता है कि वोट रद होने का जोखिम पार्टी नहीं उठा सकती थी। इस कारण तीन अधिक वोट अपने प्रत्याशी को दिलाया। इसके बावजूद सवाल उठता है कि इंडिया गठबंधन यदि एकजुट रहा तो नाथवानी को 30 वोट मिले कैसे। जेएलकेएम विधायक जयराम महतो को भी जोड़ दिया जाए तो एनडीए के पास मात्र 25 वोट थे। सवाल यह भी उठता है कि मॉक पोल के बावजूद तीन-तीन माननीयो के वोट कैसे रद हो गए। वोट रद होने का खेल भी नया नहीं है। राज्यसभा चुनाव में राजधनवार के भाकपा माले विधायक राजकुमार यादव का भी वोट एक बार रद हुआ था। पार्टी ने इसके लिए उन्हें शो-कॉज भी किया था। बहरहाल किन विधायकों ने क्रॉस वोटिंग किए, यह अभी साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता है। इसके लिए अभी सभी पार्टियां मंथन करेगी।

 

इंडिया गठबंधन के अंदर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू

 

नाथवानी के जीतते ही इंडिया गठबंधन के अंदर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस के प्रभारी के राजू ने हार का ठीकरा माले व राजद पर फोड़ा है। के. राजू ने खुलकर कहा कि कांग्रेस के 16 के अलावा झामुमो के चार विधायकों ने कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को वाेट दिए। उनका आरोप है कि राजद और माले के धोखा देने से हमारे उम्मीदवार हारे हैं। उन्होंंने कहा कि वह लिखकर दे सकते हैं कि कांग्रेस के किसी भी विधायक ने क्रॉस वोटिंग नहीं की है। वहीं भाकपा माले के राज्य सचिव मनोज भक्त ने कहा है कि माले के दोनों विधायकों अरूप चटर्जी व चंद्रदेव महतो ने अपना वोट कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को दिया है। मिले वोटों से स्पष्ट है कि कांग्रेस अपने विधायकों को संभाल नहीं पायी। उनका कहना है कि बड़ी पार्टियां अपने गिरेबान में झांके। मनोज भक्त ने सोशल मीडिया पर यह सवाल उठाया है कि क्यों बिक रहे हैं बार-बार कांग्रेस के विधायक?

 

 

विधायकों की संख्या :

 

इंडी गठबंधन

झामुमो 34, कांग्रेस 16, राजद 4, भाकपा माले 2 : कुल 56

 

एनडीए

 

भाजपा 21, लोजपा एक, जदयू एक, आजसू एक : कुल 24

जेएलकेएम जयराम महतो का समर्थन पाकर एनडीए के पास कुल 25 विधायक

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