मानसिक तनाव से मुक्ति के लिए सकारात्मक सोच, आत्मचिंतन, ध्यान एवं संतुलित जीवनशैली आवश्यक
कबीर वाणी और आध्यात्मिक संदेशों से गुंजायमान हुआ व्याख्यान श्रृंखला का चतुर्थ दिवस
युवा पीढ़ी को मानसिक दृढ़ता एवं आध्यात्मिक संतुलन की भी आवश्यकता : डॉ शालिनी खोवाला
डीजे न्यूज, गिरिडीह : छात्रों के बौद्धिक विकास, सकारात्मक चिंतन एवं सृजनात्मक क्षमता के संवर्धन के उद्देश्य से आई.क्यू.ए.सी. सेल के तत्वावधान में वनहट्टी स्थित स्कॉलर बीएड कॉलेज में आयोजित पाँच दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला के चतुर्थ दिवस पर “स्ट्रेस मैनेजमेंट” विषय पर प्रेरणादायी व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में कबीर ज्ञान मंदिर, गिरिडीह की साध्वी गीता बहन एवं साध्वी नरवदा बहन उपस्थित रहीं।
कॉलेज की प्राचार्या डॉ. शालिनी खोवाला एवं डीएलएड प्रभारी डॉ. हरदीप कौर ने संयुक्त रूप से पुष्पगुच्छ एवं मोमेंटो प्रदान कर अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया।
साध्वी बहनों ने अपने ओजस्वी एवं आध्यात्मिक विचारों से विद्यार्थियों को तनावमुक्त जीवन जीने की कला सिखाई। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मानसिक तनाव एक गंभीर चुनौती बन चुका है, जिससे मुक्ति पाने के लिए सकारात्मक सोच, आत्मचिंतन, ध्यान एवं संतुलित जीवनशैली अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कबीर वाणी के माध्यम से विद्यार्थियों को धैर्य, आत्मविश्वास एवं आंतरिक शांति बनाए रखने का संदेश दिया। चिंता नहीं, चिंतन करें’ साध्वी गीता भारती बहन ने कबीर वाणी से दिया प्रेरणा का संदेश।
उन्होंने कबीरदास के प्रसिद्ध दोहे
*”चिंता ऐसी डाकिनी, काट कलेजा खाय।
वैद्य बिचारा क्या करे, कहाँ तक दवा लगाय
का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को चिंता से दूर रहकर रचनात्मक चिंतन अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता एवं सकारात्मक सोच ही जीवन में मानसिक संतुलन एवं सफलता का आधार है।
*साध्वी नरवदा बहन ने सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने की कला व्यावहारिक उदाहरणों के साथ प्रेरित करते हुए बताया। उन्होंने गीतों के माध्यम से बच्चों में नई ऊर्जा का संचार किया और वातावरण को सकारात्मक भावना से संचारित किया
“कबीर के दोहों के माध्यम से प्राचार्या ने विद्यार्थियों में भरा आत्मविश्वास और नई ऊर्जा”**
यह अपने स्वागत संबोधन में प्राचार्या डॉ. शालिनी खोवाला ने कबीर के प्रेरणादायी दोहों के माध्यम से विद्यार्थियों को सकारात्मक चिंतन एवं आत्मविश्वास का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि तनाव जीवन का हिस्सा है, किंतु सकारात्मक दृष्टिकोण, संयम और आत्मबल से उस पर विजय प्राप्त की जा सकती है।
डॉ खोवाला ने प्रेरित करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी को केवल ज्ञान ही नहीं बल्कि मानसिक दृढ़ता एवं आध्यात्मिक संतुलन की भी आवश्यकता है।
*मन के हारे हार है मन के जीते जीत* कबीर की इन पंक्तियों को बोलते हुए उन्होंने प्रशिक्षु गण को यह संकल्प कराया कि जीवन में परिस्थिति कैसी भी रहे मन को शांत सकारात्मक और संतुलित रखेंगे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुधांशु शेखर हंसियाँ ने तथा धन्यवाद ज्ञापन सहायक व्याख्याता आशीष राज ने किया। इस अवसर पर कॉलेज के सभी सहायक प्राध्यापकगण, शिक्षकेत्तर कर्मचारी एवं प्रशिक्षु छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।