



...ऐसे थे कामरेड चतुरानन मिश्र
तीन-तीन बार रहे गिरिडीह के विधायक और देश के कृषि मंत्री लेकिन अपने लिए एक झोपड़ी भी नहीं बनाई
दिवंगत दिग्गज कामरेड की जयंती पर देवभूमि झारखंड न्यूज की विशेष रिपोर्ट


दिलीप सिन्हा, राजनीतिक संवाददाता देवभूमि झारखंड न्यूज, गिरिडीह : देवगोड़ा सरकार में देश के कृषि मंत्री रहे कामरेड चतुरानन मिश्र की आज सात अप्रैल को जयंती है। देश के नामचीन कम्युनिस्ट नेता रहे चतुरानन मिश्र की राजनीतिक कर्मभूमि मुख्य रूप से झारखंड का गिरिडीह एवं हजारीबाग रहा है। उनकी ईमानदारी का नमूना यह है कि तीन-तीन बार गिरिडीह के विधायक रहने के बावजूद उनका गिरिडीह या उनके पैतृक शहर बिहार के मधुबनी में एक मकान तक नहीं है। चतुरानन मिश्र के सानिध्य में राजनीत का ककहरा सिखने वाले झारखंड के दिग्गज कम्युनिस्ट नेता व हजारीबाग के पूर्व सांसद भुनेश्वर प्रसाद मेहता ने देवभूमि झारखंड न्यूज को बताया कि कामरेड चतुरानन मिश्र ईमानदारी एवं सादगी की मिसाल थे। मधुबनी के गांव में जो उनका पैतृक मकान है, उसके अलावा उन्होंने अपने जीवन में कहीं भी अपने लिए एक मकान तक नहीं बनाया। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार के मंत्री रहते हुए भी उन्होंने मंत्री का आवास तक नहीं लिया। पूर्व सांसद भुनेश्वर मेहता बताते हैं कि वृद्धावस्था पेंशन अौर सामाजिक सुरक्षा योजना की परिकल्पना चतुरानन मिश्र की ही थी। छोटे एवं मध्यम किसानों के लिए कृषि मंत्री के रूप में उन्होंने जो कुछ किया वह एक मिसाल है। चतुरानन मिश्र के साथ लंबे समय तक काम करने वाले गिरिडीह के दिग्गज कम्युनिस्ट नेता नंदलाल यादव अब दिवंगत हो चुके हैं। उनके पुत्र व फारवर्ड ब्लाक के वरिष्ठ नेता राजेश यादव ने बताया कि चतुरानन मिश्र उनके पिता से मिलने उनके आवास पर आते थे। बचपन में उनसे बराबर मुलाकात होती थी। सफेद धोती और कुर्ता में हवाई चप्पल
पहनकर वे आते थे। यहां हम आपको बता दें चतुरानन मिश्रा लगातार तीन टर्म गिरिडीह के विधायक रहे हैं। उनका रिकार्ड आज तक कोई गिरिडीह में तोड़ नहीं सका है और ना ही उसकी बराबरी कर सका है।

चतुरानन मिश्र वामपंथी राजनीति के इतिहास में एक बड़ा नाम है। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी के वे राष्ट्रीय नेता थे। साथ ही वामपंथी ट्रेड यूनियन ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी थे। चतुरानन मिश्र को अपना राजनीतिक गुरु मानने वाले पूर्व सांसद भुनेश्वर प्रसाद मेहता ने बताया कि स्वतंत्रता की लड़ाई में चतुरानन मिश्र जेल गए थे। जेल में ही वे कम्युनिस्ट बने। आजादी के बाद भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ने उन्हें कार्य करने के लिए गिरिडीह भेज दिया। गिरिडीह के गद्दी मुहल्ला में भाकपा की झोपड़ीनुमा कार्यालयों में करीब तीन दशक तक रहकर उन्होंने मजदूरों और किसानों को गोलबंद किया। पहली बार चतुरानन मिश्र गिरिडीह से भाकपा के विधायक 1969 में बने। 69 से 80 तक वे गिरिडीह के विधायक रहे। बिहार से वे दो बार 84 एवं 90 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। 96 में वे मधुबनी से लोकसभा पहुंचे। गिरिडीह एवं हजारीबाग से लोकसभा नहीं पहुंचने का उन्हें मलाल था। हालांकि उनका कहना था कि जीवन मे उन्होंने जो कुछ भी हासिल किया, वह गिरिडीह के संघर्षों के बल पर ही किया है।



