बोकारो के विस्थापित युवाओं के हक़ में लोकसभा में गरजे सांसद दुलू महतो खेत दिए, घर दिए… अब बच्चों का भविष्य भी कुर्बान : सांसद ढुलू महतो

बोकारो के विस्थापित युवाओं के हक़ में लोकसभा में गरजे सांसद दुलू महतो

खेत दिए, घर दिए… अब बच्चों का भविष्य भी कुर्बान : सांसद ढुलू महतो

डीजे न्यूज, धनबाद:लोकसभा के पटल पर गुरुवार को धनबाद लोकसभा क्षेत्र के सांसद दुलू महतो ने बोकारो इस्पात संयंत्र से जुड़े हजारों विस्थापित परिवारों की पीड़ा को मजबूती से उठाया। नियम 377 के तहत उन्होंने सरकार और इस्पात मंत्रालय का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि जिन परिवारों ने देश के औद्योगिक विकास के लिए अपनी उपजाऊ जमीन, घर और पहचान तक त्याग दी, आज उन्हीं के बच्चों का भविष्य प्रशासनिक लापरवाही और नीतिगत अड़चनों के कारण अंधकार में धकेला जा रहा है।

महामारी और सिस्टम की मार से प्रभावित विस्थापित युवा

सांसद महतो ने सदन को अवगत कराया कि विस्थापित परिवारों के सैकड़ों युवाओं ने वर्षों पहले इस उम्मीद में आईटीआई और अप्रेंटिस प्रशिक्षण पूरा किया था कि उन्हें उसी बोकारो स्टील प्लांट में रोजगार मिलेगा, जिसके लिए उनके पुरखों ने जमीन दी थी। लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण प्रशिक्षण प्रक्रिया बाधित हुई और इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर हुई देरी ने इन युवाओं को ऐसी स्थिति में ला खड़ा किया, जहां वे उम्र सीमा पार कर चुके हैं और अब रोजगार की प्रक्रिया से बाहर किए जा रहे हैं।

यह सिर्फ नौकरी नहीं, सामाजिक न्याय का सवाल है

सांसद दुलू महतो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मुद्दा केवल कुछ लोगों को नौकरी देने का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभाने का है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि महामारी और सिस्टम की वजह से हुई देरी का खामियाजा विस्थापित युवाओं को न भुगतना पड़े, इसके लिए आयु सीमा में विशेष छूट दी जाए और अप्रेंटिस पूरा कर चुके युवाओं के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाया जाए, ताकि वे सम्मान के साथ अपने हक का रोजगार पा सकें।

बोकारो स्टील प्लांट की नींव विस्थापितों के त्याग पर

ढुलू महतो ने सदन में भावुक शब्दों में कहा कि बोकारो स्टील प्लांट की चमक-दमक के पीछे उन हजारों परिवारों का पसीना और बलिदान छिपा है, जिन्होंने अपने खेत, घर और जीवन का आधार खो दिया। यदि आज उनके बच्चों को उम्र की सीमा का हवाला देकर बाहर किया जा रहा है, तो यह सामाजिक न्याय की आत्मा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि वे विस्थापित परिवारों के अधिकारों की रक्षा के लिए संसद से लेकर सड़क तक हर मंच पर संघर्ष करते रहेंगे।

विस्थापित परिवारों में जगी नई उम्मीद

सांसद ढुलू महतो द्वारा लोकसभा में इस मुद्दे को मजबूती से उठाए जाने के बाद बोकारो और धनबाद क्षेत्र के विस्थापित परिवारों में नई उम्मीद जगी है। लोगों को भरोसा है कि अब केंद्र सरकार इस गंभीर और संवेदनशील विषय पर ठोस निर्णय लेगी और वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों को उनका अधिकार मिलेगा। यह मुद्दा अब केवल रोजगार का नहीं, बल्कि सम्मान, अधिकार और पीढ़ियों के भविष्य का सवाल बन चुका है।

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