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माटी के गिदर ( खोरठा)
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हाय रे हमर टुंडीक माटी,
टाइंड टुकूर सोनार टांटी
बूढ़ कांदे गिदर हांसे
हमर मांदर पोहना नाचे।
चूल्हा हमर हंडिया हमर
कोदो हमर मड़ुआ हमर
ढेकी आर भनसा भी हमर
आर भात रांधे बाहरी गिदर ।
आंटी हमर बिंड़ा ओकर
धान हमर चिरा ओकर
सांझ हमर भींसर ओकर
रायज करे शहरी गिदर।
रोपल हमर फरल ओकर
कुइयां हमर पानी ओकर
वोट हमर चोट ओकर
शासन पर जोट ओकर।
सुतल सभे जागल गिदर
पानी से हे मातल गिदर
पोठी पर प्राण जोड़े
मांगुर से हारल गिदर ।
खोजे हे आंएख हमर
माटी के एक चोख गिदर
जे माटी पर रायज करै
माटी के बाइत करै।
नाम करे काम करै
माटी के गुण गान करै
टुंडी के जनता के
सगरो सम्मान करै ।।
जयंत
