हाथ-पैर से बच्चों की तरह रेंगते हुए और कमर में रस्सी बांधकर डोली खींचते हुए पहुंचे बाबाधाम  बेटी की मन्नत पूरी हुई तो झुकी श्रद्धा

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हाथ-पैर से बच्चों की तरह रेंगते हुए और कमर में रस्सी बांधकर डोली खींचते हुए पहुंचे बाबाधाम

बेटी की मन्नत पूरी हुई तो झुकी श्रद्धा

डीजे न्यूज, देवघर : बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर हर साल लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और समर्पण का साक्षी बनती है। लेकिन इस बार एक श्रद्धालु की तपस्या और श्रद्धा ने सबको भावुक कर दिया। बिहार के मुजफ्फरपुर से आए मिथिलेश कुमार ने बेटी की मन्नत पूरी होने पर अनोखे अंदाज़ में बाबा का धन्यवाद किया — हाथ-पैर से बच्चों की तरह रेंगते हुए और कमर में रस्सी बांधकर डोली खींचते हुए उन्होंने 105 किलोमीटर की कठिन यात्रा पूरी की।

मिथिलेश ने बताया कि उनके परिवार में चार भाई हैं, लेकिन किसी को बेटी नहीं थी। उन्होंने बाबा बैद्यनाथ से मन्नत मांगी थी कि सभी भाइयों को बेटी का सुख मिले। मन्नत के बाद छोटे भाई के घर बेटी का जन्म हुआ। वचनबद्ध मिथिलेश ने उसी बेटी की तस्वीर एक डोली में रखकर कमर से रस्सी बांधकर उसे खींचते हुए देवघर तक की कठिन यात्रा की।

उन्होंने कहा, “मैंने बाबा से बेटी मांगी थी और बाबा ने सुनी। आज जब घर में बेटी की किलकारी गूंजी है, तो मैं अपने वचन के अनुसार बाबा के चरणों में धन्यवाद अर्पित करने आया हूँ।”

बाबा बैद्यनाथ को श्रद्धालु “मनोकामना लिंग” कहते हैं क्योंकि मान्यता है कि यहां मांगी गई हर प्रार्थना पूर्ण होती है। मिथिलेश की यह अनूठी आस्था और समर्पण न केवल आस्था की शक्ति को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि आज भी समाज में बेटियों को ईश्वर का वरदान माना जाता है।

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