

























































यूजीसी एक्ट से भड़का गिरिडीह का सवर्ण समाज, विरोध में किजपा का धरना-प्रदर्शन

बबलू भारद्वाज ने भाजपा से दिया इस्तीफा, सवर्ण एकता मंच गिरिडीह ने उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
डीजे न्यूज, गिरिडीह : यूजीसी एक्ट 2026 के लागू होते ही सवर्ण समाज भड़क गया है। भाजपा नेता बबलू भारद्वाज ने जहां इसके विरोध में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है वहीं कई संगठनों ने प्रदर्शन कर व उपायुक्त को ज्ञापन देकर विरोध जताया है। इधर इसके विरोध और इस एक्ट को वापस करने की मांग को लेकर मंगलवार को किसान जनता पार्टी ने धरना प्रदर्शन किया। शहर के झंडा मैदान में धरना देकर किजपा ने यूजीसी एक्ट का विरोध किया और कहा कि भाजपा के फूल डालकर राज करने की नीति का जोरदार विरोध किया जाएगा।
किजपा केंद्रीय कमेटी अध्यक्ष सह अधिवक्ता अवधेश कुमार सिंह ने कहा कि भाजपा शुरू से अपने स्वार्थ में हमें धर्म के नाम पर लड़ाते आ रही है। अब यूजीसी रेग्युलेशन 2026 लाकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ी जातियों के मन में सामान्य जातियों के प्रति घृणा और नफरत का बीज बो दिया है। कहा कि भाजपा के फुट डालो और शासन करो की नीति का हमें जोरदार तरीके से विरोध करना होगा। कहा कि भाजपा ने पहले हिन्दू-मुस्लिम को आपस में लड़ाके देश को कमजोर कर दिया है। अब शिक्षा के मंदिर में छात्र-छात्राओं को जाति के नाम पर लड़ाके अपना वोट बैंक बनाने को जो सपना देखा जा रहा है, उसे हम सफल नहीं होने देंगे। किजपा के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष जोगेश्वर ठाकुर ने कहा हम ओबीसी के लोग सामान्य जातियों से भाईचारा बनाए रखना चाहते हैं, इसलिए किसी भी कीमत पर हमलोग यूजीसी बिल को वापस करा कर ही दम लेंगे। संयोजक दासो मुर्मू और संस्थापक सदस्य बटू मरांडी ने कहा कि भाजपा यूजीसी बिल लाकर हमारे बच्चों को लड़ाना चाहती है। धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम में विजय सिंह, जहांगीर अंसारी, शंभू राय, बिकेश राय, छत्रधारी सिंह, जसीनता मरांडी, रीना टुडू, थाम्भी मंडल, घनश्याम पंडित, मालती देवी, ममता कुमारी, बीबीयाना मरांडी, बैजल हांसदा, महादेव विश्वकर्मा, टिपण ठाकुर सहित सैकड़ों महिला पुरुष उपस्थित थे।
चित्र 27 जीआरडी 51 झंडा मैदान में धरना देते किसान जनता पार्टी के लोग।
सवर्ण एकता मंच ने राष्ट्रपति के नाम डीसी को सौंपा ज्ञापन
यूजीसी द्वारा प्रस्तावित/लागू किए गए भेदभाव निषेध विनियमों को लेकर सवर्ण एकता मंच गिरिडीह (झारखंड) ने गहरी चिंता जताई है। इस संबंध में मंच की ओर से मंगलवार को राष्ट्रपति के नाम गिरिडीह उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा गया है। जिसमें विनियमों के संभावित दुष्प्रभावों पर पुनर्विचार तथा संतुलित सुरक्षा प्रावधान जोड़े जाने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया कि संविधान समानता, गरिमा और न्याय का समर्थक है। भेदभाव के विरुद्ध कठोर कदम आवश्यक हैं, लेकिन ऐसे कानून भी नहीं होने चाहिए जो स्वयं किसी नए प्रकार के संस्थागत अन्याय, असंतुलन या भय का वातावरण पैदा करें। मंच का कहना है कि वर्तमान स्वरूप में भेदभाव निषेध विनियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 की भावना के अनुरूप हैं या नहीं, इस पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। ज्ञापन में सरकार से मांग की गई है कि भेदभाव की स्पष्ट, वस्तुनिष्ठ और साक्ष्य-आधारित परिभाषा तय की जाए। हर शिकायत पर औपचारिक कार्रवाई से पहले निष्पक्ष प्रारंभिक जांच अनिवार्य हो। शिकायत निवारण समितियों में सभी वर्गों का संतुलित प्रतिनिधित्व और स्वतंत्र कानूनी विशेषज्ञ को शामिल किया जाए। झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर दंडात्मक प्रावधान जोड़े जाएं तथा मेरिट आधारित अकादमिक निर्णयों को स्वतः भेदभाव की श्रेणी में न रखा जाए। सवर्ण एकता मंच ने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे कानूनों को बढ़ावा देगी, जो भेदभाव समाप्त करने के साथ-साथ सभी वर्गों के लिए न्याय, सुरक्षा और विश्वास का वातावरण भी सुनिश्चित करेगी।



