वायु प्रदूषण समाधान के लिए विज्ञान और तकनीक पर दिया जोर

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वायु प्रदूषण समाधान के लिए विज्ञान और तकनीक पर दिया जोर

डीजे न्यूज, धनबाद: आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के पर्यावरण विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला “एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग एंड डेटा एनालिसिस का शुभारंभ शनिवार को हुआ। देश-विदेश के वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और शोधार्थियों की उपस्थिति ने पहले दिन को अत्यंत सार्थक बना दिया।
स्वागत भाषण में प्रो. मनीष जैन ने बढ़ते वायु प्रदूषण की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्नत मॉनिटरिंग तकनीक, रियल-टाइम डेटा विश्लेषण और बहु-विषयक शोध की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला वैज्ञानिक शोध को नीतिगत निर्णयों से जोड़ने का मंच प्रदान कर रही है।
मुख्य अतिथि नीलैश कुमार साह, संयुक्त सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार ने कहा कि प्रभावी वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए विश्वसनीय डेटा और मजबूत नियामक ढांचा अनिवार्य है। उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय और नीति-निर्माताओं के बीच सहयोग बढ़ाने पर बल दिया।
अध्यक्षता करते हुए निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने ‘ज्ञान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी’ के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि ज्ञान आधार है, विज्ञान उसका विश्लेषण है और प्रौद्योगिकी उस विज्ञान का व्यावहारिक उपयोग है, जो देश की प्रगति और आर्थिक विकास में सहायक बनता है।
पर्यावरण विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. आलोक सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि विभाग का लक्ष्य विज्ञान आधारित और तकनीक समर्थित समाधान विकसित करना है। उन्होंने सैटेलाइट डेटा, ग्राउंड मॉनिटरिंग नेटवर्क, एआई आधारित मॉडलिंग और उद्योग सहयोग को एकीकृत कर समग्र वायु गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उद्घाटन दिवस पर प्रो. योगिंदर पी. चुघ (एसआईयू-कार्बोंडेल, अमेरिका) ने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में वायु गुणवत्ता की चुनौतियों पर मुख्य व्याख्यान दिया। तकनीकी सत्रों में वायु गुणवत्ता नीति, लो-कॉस्ट सेंसर, स्रोत विश्लेषण, खनन क्षेत्रों में धूल के प्रभाव और प्रदूषण नियंत्रण रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। पोस्टर प्रस्तुति, उपकरण प्रदर्शन और टेक्समिन लैब भ्रमण ने प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया।
कार्यशाला का समापन रविवार को उन्नत तकनीकी सत्रों और वैलिडिक्टरी कार्यक्रम के साथ होगा, जिसमें सैटेलाइट-ग्राउंड डेटा एकीकरण, एआई आधारित आकलन और वैश्विक मॉनिटरिंग दिशानिर्देशों पर चर्चा होगी।

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