टुंडी में कुत्ते का जूठा प्रसाद खाने से 75 से अधिक लोग बीमार, अस्पताल में डॉक्टर नहीं रहने से हंगामा 

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टुंडी में कुत्ते का जूठा प्रसाद खाने से 75 से अधिक लोग बीमार, अस्पताल में डॉक्टर नहीं रहने से हंगामा

 

रेबीज इंजेक्शन के लिए घंटों टुंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इंतजार करते रहे लोग, छोटे-छोटे बच्चों के साथ भूखे-प्यासे अस्पताल में बैठी रहीं महिलाएं 

संजीत तिवारी, टुंडी(धनबाद) : कुत्ते का जूठा प्रसाद खाने से लोधरिया के 75 से अधिक ग्रामीण जिसमें छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हैं, बीमार पड़ गए। बुधवार की सुबह जब पीड़ित लोग टुंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो वहां सिर्फ एक डॉक्टर डयूटी पर थे जबकि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. श्रवण कुमार समेत अन्य डॉक्टर नदारद थे। चिकित्साकर्मियों की उपस्थिति नगण्य थी। मरीजों का निबंधन करने के लिए भी कर्मचारी नहीं थे। प्रभारी के बारे में कुछ बता पाने की स्थिति में न तो डयूटी पर मौजूद एकलौता डॉक्टर रित्विक लोचन थे और न ही कोई कर्मी। वहां की स्थिति काफी खराब थी। महिलाएं गोद में छोटे-छोटे बच्चे जो पीड़ित थे को लेकर अस्पताल पहुंचे थे। बच्चे भूख और प्यास से बिलख रहे थे। जब लोगाें के सब्र का बांध टूट गया तो वे हंगामा करने लगे। स्थिति काफी खराब हो गई। गोद में पड़े बच्चे बिलख रहे थे, उनकी माता इससे तड़प रही थीं। बाद में पीड़ितों के साथ आए लोगों ने खुद रजिस्टर निकालकर पीड़ितों का नाम लिखना शुरू किया। लोगों ने बताया कि यहां रहना तो दूर इस अस्पताल में डयूटी पर सिर्फ एक डॉक्टर आते हैं। डॉक्टरों ने रोटेशन सिस्टम बना रखा है। एक डॉक्टर डयूटी पर एक दिन रहते हैं और बाकी डॉक्टर शहरों में प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं और नर्सिंग होम चलाते हैं। खुद यहां के प्रभारी डॉ. श्रवण कुमार का धनबाद के ढांगी मोड़ में नर्सिंग होम चल रहा है। इधर खुद श्रवण कुमार ने भी स्वीकार किया कि वह धनबाद में रहते हैं। उनका कहना है कि प्रखंड मुख्यालय में रहना उनके लिए अनिवार्य नहीं है, जबकि टुंडी के अंचल अधिकारी सुरेश प्रसाद बरनवाल ने बताया कि सभी सरकारी कर्मियों का मुख्यालय में रहना अनिवार्य है। यह सरकार का निर्देश है। अंचल अधिकारी ने बताया कि इस मामले में वह उप विकास आयुक्त से बात कर उन्हें पूरी जानकारी देंगे। अंचल अधिकारी मनियाडीह अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र भी दोपहर पौने तीन बजे पहुंचे थे। वहां न तो कोई डॉक्टर था और न ही कोई चिकित्साकर्मी। इधर लोधरिया के पीड़ित विक्रम भारद्वाज ने बताया कि टुंडी के अस्पताल में यहां डॉक्टर नहीं रहते हैं। सिर्फ एक डॉक्टर रहते हैं, बाकी सभी शहरों में प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। सुबह से दोपहर एक बज गए हैं, लेकिन अभी तक बच्चों को भी इंजेक्शन नहीं मिल सका है।

उन्होंने कहा कि यदि सभी पीड़ितों को तीन दिनों के अंदर इंजेक्शन नहीं उपलब्ध कराया गया तो लोधरिया मोड़ को ठप कर देंगे। लोधरिया के ही राजदेव चौधरी ने भी टुंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली को लेकर रोष जताया। उन्होंने कहा कि यहां के लोग इलाज के बिना मर जाते हैं। कोई उनका दर्द देखने सुनने वाला नहीं है।

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