टुंडी में बाहा परब का उत्सव : समाज की एकता और समृद्धि का प्रतीक

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टुंडी में बाहा परब का उत्सव : समाज की एकता और समृद्धि का प्रतीक

 

वन रक्षाबंधन का किया आयोजन, सखुआ पेड़ पर रक्षा सूत्र बांध कर पेड़ों की रक्षा करने का लिया संकल्प

डीजे न्यूज, टुंडी, धनबाद : सोरोस चिरगाल संथाल समाज टुंडी, पुर्वी टुंडी की ओर से बुधवार को बाहा परब के अवसर पर टुंडी बुरु दिशोम जाहेरथान टुंडी में बाहा बोंगा नायके बाबा सावन बेसरा ने पारंपरिक तरीके से पूजा अर्पण कर बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

बाहा परब या बाहा बोंगा आदिवासी संथाल जनजाति का एक महत्वपूर्ण पर्व है। बाहा का अर्थ फूल है। इस पर्व के अवसर पर बच्चे, पुरुष व महिलाएं सभी अपनी परंपरागत वस्त्र धारण कर प्रकृतिक सखुआ पेड़ को पूजा करते हैं।

जाहेर समिति के गोविन्द टुडू ने बताया कि बाहा पर्व आदिवासी संथाल समाज की समृद्ध परंपरा, प्रकृति के प्रति आस्था और सामुदायिक जीवन का प्रतीक है। यह पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने, अपनी संस्कृति और परम्पराओं को सहेजकर रखने तथा समाज में आपसी सहयोग और एकता को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।

इस अवसर पर वन विभाग एवं पूजा समिति के द्वारा वन रक्षाबंधन का आयोजन किया गया जिसमें सखुआ पेड़ पर रक्षा सूत्र बांध कर पेड़ों की रक्षा करने का संकल्प लिया गया।

 

कार्यक्रम में मुख्य रूप से वन प्रक्षेत्र, वन प्रमंडल धनबाद के सहायक वन संरक्षक अजय कुमार मंजुल, टुंडी प्रखंड विकास पदाधिकारी विशाल पांडेय, टुंडी थाना प्रभारी उमाशंकर सिंह, जिप सदस्य गुरू चरण बास्की, जिप सदस्य मीना हेम्ब्रम, प्रमुख मालती मराण्डी, विधायक प्रतिनिधि फुलचंद किस्कू आयोजन समिति के गोविन्द टुडू बिनोद मुर्मू, मनमोहन हेम्र्बम, मुनिलाल हाँसदा, बुधन बास्की, विजय हाँसदा, शक्ती हेम्ब्रम, बुधन हेम्ब्रम, हितलाल मुर्मू, राजेन्द्र मुर्मू, दिनेश मुर्मू, मुनिलाल सोरेन, अनिल मुर्मू, प्रकाश मराण्डी, शक्ति टुडू, शिव शंकर सोरेन, जयदेव टुडू अवधेश टुडू एवं समाज के हजारों लोग शामिल हुए।

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