


टुंडी के बुजुर्ग से डिजिटल अरेस्ट का भय दिखा 10.50 लाख की साइबर ठगी, आरोपी को भोपाल से दबोचा

साइबर पुलिस धनबाद को मिली बड़ी सफलता, केरल, कर्नाटक समेत अन्य राज्यों तक फैला हुआ है गिरोह का नेटवर्क
डीजे न्यूज, धनबाद : डिजिटल युग में साइबर अपराधी ठगी के नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। अब ठगों ने “डिजिटल अरेस्ट” जैसा डरावना नाम देकर लोगों को मानसिक दबाव में लेने की साजिश रचनी शुरू कर दी है। धनबाद में ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग से डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर 10 लाख 50 हजार रुपये की साइबर ठगी की गई। इस मामले का खुलासा करते हुए धनबाद साइबर थाना पुलिस ने एक आरोपी को मध्य प्रदेश के भोपाल से गिरफ्तार किया है।
सावधान हो जाइए! साइबर ठग अब डिजिटल अरेस्ट के नाम पर भी लोगों को ठग रहे हैं। धनबाद साइबर थाना पुलिस ने ऐसे ही एक गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो बुजुर्गों को निशाना बनाकर लाखों की ठगी कर रहा था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह का नेटवर्क केरल, कर्नाटक समेत अन्य राज्यों तक फैला हुआ है।
साइबर ठग रोज ठगी के नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं।
विगत 8 जनवरी को टुंडी थाना क्षेत्र अंतर्गत रतनपुर निवासी 73 वर्षीय सेबेस्टियन होरो ने धनबाद साइबर थाना में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित के अनुसार अज्ञात साइबर अपराधियों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से खुद को ईडी और सीबीआई का अधिकारी बताते हुए मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी दी।
अपराधियों ने बुजुर्ग को तथाकथित डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर मानसिक दबाव बनाया और जांच से बचाने के नाम पर उनसे 10 लाख 50 हजार रुपये विभिन्न फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक धनबाद के निर्देश पर साइबर थाना प्रभारी रविकांत प्रसाद के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया। टीम ने तकनीकी विश्लेषण, बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया।
जांच के क्रम में पुलिस ने भोपाल, मध्य प्रदेश से इस कांड के प्राथमिकी अभियुक्त अरुण अहिरवार को गिरफ्तार किया। पुलिस अनुसंधान में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक कंपनी के नाम से करंट अकाउंट तथा अपने नाम से बचत खाता खुलवाया था। ठगी की रकम में से 5 लाख 50 हजार रुपये उसके खातों में ट्रांसफर किए गए थे, जिनमें से 5 लाख रुपये उसने चेक के माध्यम से निकालकर अपने अन्य सहयोगियों में बांट दिए।
गिरफ्तार आरोपी के पास से पुलिस ने एक मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड भी बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी में किया जा रहा था। इस पूरे मामले की जानकारी ग्रामीण एसपी कपिल चौधरी ने प्रेस वार्ता के दौरान दी। उन्होंने बताया कि पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में जुटी हुई है।
इधर ग्रामीण एसपी कपिल चौधरी ने पत्रकारों को बताया कि धनबाद में यह अब तक का पहला मामला है, जिसमें डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर साइबर ठगी की गई है। पुलिस आम नागरिकों से अपील कर रही है कि कोई भी सरकारी एजेंसी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। यदि कोई व्यक्ति ईडी, सीबीआई, पुलिस या किसी भी जांच एजेंसी के नाम पर कॉल या वीडियो कॉल कर पैसे की मांग करता है, तो उसे तुरंत साइबर ठगी समझें और नजदीकी थाना या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दें। किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या संदिग्ध लिंक पर भरोसा न करें।



