


टेट की अनिवार्यता पर शिक्षकों के संघर्ष की बड़ी जीत, केंद्र सरकार ने राज्यों से मांगा प्रभावित शिक्षकों का पूरा ब्योरा 

अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव सह राष्ट्रीय महासचिव टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया राम मूर्ति ठाकुर एवं डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा का प्रयास रंग लाया
डीजे न्यूज, धनबाद : “संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता”—इस कथन को एक बार फिर सच साबित करते हुए 01 सितंबर 2025 को आए टेट की अनिवार्यता संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ चले संगठित शिक्षक आंदोलन को सही दिशा में बड़ी सफलता मिलती दिख रही है। अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ (AJPTA) के प्रदेश महासचिव सह राष्ट्रीय महासचिव टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI)राम मूर्ति ठाकुर द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर उठाए गए ठोस कदम, सभी राज्यों को जोड़कर साझा संघर्ष खड़ा करने के प्रयास और TFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा के नेतृत्व में 19 दिसंबर 2025 को हुई महत्वपूर्ण बैठक व प्रभावी वार्ता का असर अब केंद्र सरकार के स्तर पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है।
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से प्रभावित शिक्षकों का विस्तृत आंकड़ा और सुझाव मांगा गया है। इस संबंध में संयुक्त सचिव (संस्थान एवं प्रशिक्षण) प्राची पांडेय द्वारा अर्ध-शासकीय पत्र संख्या 3-3/2024-IS.20 दिनांक 31 दिसंबर 2025 को जारी किया गया है।
पत्र में 01.09.2025 तथा 17.11.2025 के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि जिन शिक्षकों की सेवा में पांच वर्ष से कम समय शेष है, वे बिना TET पास किए सेवानिवृत्ति तक सेवा दे सकते हैं, हालांकि पदोन्नति के लिए TET अनिवार्य रहेगा। वहीं RTE अधिनियम से पूर्व नियुक्त ऐसे शिक्षक, जिनके पास सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक का समय बचा है, उन्हें सेवा जारी रहने की तारीख से दो वर्षों के भीतर TET पास करना अनिवार्य होगा, अन्यथा उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है।
शिक्षा मंत्रालय ने यह भी स्वीकार किया है कि इस निर्णय को लेकर व्यक्तिगत शिक्षकों, शिक्षक संगठनों, सांसदों सहित कई स्तरों से बड़ी संख्या में अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें यह चिंता जताई गई है कि करियर के अंतिम पड़ाव पर खड़े शिक्षकों के लिए TET पास करना न केवल कठिन बल्कि मानसिक रूप से कष्टदायक हो सकता है, जिससे उनकी वर्षों की सेवा से अर्जित आर्थिक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। साथ ही अनुभवी शिक्षकों के संभावित निष्कासन से राज्य की शिक्षा व्यवस्था में गंभीर शून्य उत्पन्न होने की आशंका भी व्यक्त की गई है।
इसी के मद्देनजर शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया है कि वे प्रभावित शिक्षकों की सटीक संख्या का विवरण निर्धारित प्रारूप में संकलित कर 16 जनवरी 2026 तक उपलब्ध कराएं। इसके साथ ही निर्णय के प्रभावों पर अपनी टिप्पणियां, संभावित राहत के रास्ते और सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त कानूनी राय भी भेजने को कहा गया है। मंत्रालय ने यह भी स्मरण कराया है कि भर्ती नियमों को NCTE के न्यूनतम मानकों के अनुरूप अद्यतन करने की प्रक्रिया को भी समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए।
इस पूरे घटनाक्रम को अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ (AJPTA) और टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के संगठित संघर्ष की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षक संगठनों का मानना है कि यह पत्र इस बात का प्रमाण है कि शिक्षकों की एकजुट आवाज ने सरकार को पुनर्विचार के लिए मजबूर किया है और आने वाले दिनों में शिक्षकों के हित में ठोस राहत का मार्ग प्रशस्त होगा।




