



सोना पहाड़ी के सरकारीकरण प्रस्ताव से विधायक के खिलाफ उबाल, पुतला दहन से गरमाई सियासत
डीजे न्यूज, बगोदर(गिरिडीह) : सोना पहाड़ी मंदिर के सरकारीकरण को लेकर क्षेत्र में विरोध की लहर तेज हो गई है। विधानसभा में इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद स्थानीय ग्रामीणों और मंदिर समिति में भारी नाराजगी देखी जा रही है। सोमवार को सोना पहाड़ी, बेको और आसपास के गांवों के लोगों ने बगोदर विधायक नागेन्द्र महतो के खिलाफ आक्रोश मार्च निकालते हुए उनका पुतला दहन किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सोना पहाड़ी स्थित मंदिर सैकड़ों वर्षों पुराना है, जहां वर्ष 1683 से पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। यह मंदिर बाबा द्वारसैनी एवं माता द्वारसैनी के रूप में प्रसिद्ध है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर का निर्माण राजा दयाल चौधरी ने करवाया था। यहां पूजा-पाठ की परंपरा ब्राह्मणों द्वारा नहीं, बल्कि राजा दयाल चौधरी के वंशजों द्वारा निभाई जाती रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि दयाल चौधरी के वंशज कुर्मी महतो वर्ग से आते हैं। उनका कहना है कि विधायक नागेन्द्र महतो स्वयं भी इसी सामाजिक वर्ग से संबंध रखते हैं। मंदिर समिति और ग्रामीणों में इस बात को लेकर विशेष नाराजगी है कि जिस वर्ग के समर्थन से वे विधायक बने, उसी वर्ग की परंपराओं और अधिकारों को प्रभावित करने वाला मुद्दा विधानसभा में उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने इसे सामाजिक विश्वास के विरुद्ध कदम बताया।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारीकरण की पहल से न केवल मूल रैयतों और दयाल चौधरी के वंशजों के पारंपरिक अधिकारों पर असर पड़ेगा, बल्कि इससे स्थानीय लोगों के रोजी-रोजगार पर भी संकट खड़ा हो सकता है। उनका कहना है कि यह कदम क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के विपरीत है।
आक्रोश मार्च सोना पहाड़ी मंदिर परिसर के समीप से शुरू होकर विभिन्न मार्गों से गुजरता हुआ सूली टांड़ पहुंचा, जहां विधायक का पुतला दहन किया गया। ताशा पार्टी, ढोल-नगाड़े और पटाखों के साथ हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीण हाथों में तख्तियां लेकर शामिल हुए और अपनी नाराजगी जताई।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।





