शहीद रणधीर प्रसाद वर्मा का शहादत दिवस कल, तैयारियां अंतिम चरण में प्रसिद्ध सूफी गायक पद्मश्री डॉ भारती बंधु की विशिष्ट शैली वाली शक्तिशाली स्वरलहरियां गूंजेगी‌

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शहीद रणधीर प्रसाद वर्मा का शहादत दिवस कल, तैयारियां अंतिम चरण में

प्रसिद्ध सूफी गायक पद्मश्री डॉ भारती बंधु की विशिष्ट शैली वाली शक्तिशाली स्वरलहरियां गूंजेगी‌

डीजे न्यूज, धनबाद: शहीद रणधीर वर्मा को उनके 35वें शहादत दिवस पर 3 जनवरी शनिवार को संगीतमय श्रद्धांजलि दी जाएगी। इस मौके पर प्रसिद्ध सूफी गायक पद्मश्री डॉ भारती बंधु की विशिष्ट शैली वाली शक्तिशाली स्वरलहरियां गूंजेगी।
केद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता धनबाद के सांसद ढुलू महतो करेंगे। धनबाद के विधायक राज सिन्हा और झरिया की विधायक रागिनी सिंह की गरिमामयी उपस्थिति होगी।


कार्यक्रम की जानकारी देते हुए रणधीर वर्मा मेमोरियल सोसाइटी के अध्यक्ष किशोर कुमार ने बताया कि इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए तैयारियां अंतिम चरण में है।
कार्यक्रम पूर्वाह्न 10 बजे से धनबाद शहर के रणधीर वर्मा चौक स्थित शहीद की आदमकद प्रतिमा के समक्ष होगा। संगीतमय श्रद्धांजलि सभा से पूर्व सशस्त्र पुलिस द्वारा शहीद को सलामी दी जाएगी।
डॉ भारती बंधु की गायकी को “भारती बंधु शैली” कहा जाता है, जो दुनिया में अपनी तरह की इकलौती शैली मानी जाती है। यह उनके पारिवारिक विरासत से विकसित हुई है। इसमें सूफी गायन की तरह गहन भाव, लयबद्ध तानें और समां बांधने की क्षमता होती है। लेकिन कबीर की साखियों और दोहों की सादगी भी बनी रहती है। जैसे, डॉ भारती जब “मन लागो मेरो यार फकीरी में…” प्रस्तुत करते हैं और फकीरी की सूफियाना भावना संत कबीर की वाणी से जुड़ती है तो, श्रोताओं का मन मस्त होता है और वे झूम उठते हैं।
किराना घराने के उस्ताद आशिक अली खान से ठुमरी-दादरा, और उस्ताद हाजी ईद अली शाह चिश्ती से 15 वर्षों तक सूफी महफिल-ए-समां की शिक्षा लेने वाले डॉ भारती बंधु के प्रथम गुरु उनके पिता स्वामी विद्याधर गैना भारती थे, जो मंदिरों में गायन करते थे।

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