



सेल के संविदा कर्मियों से जुड़े विषयों पर सांसद ढुलू ने रखा मानवीय पक्ष

डीजे न्यूज, धनबाद: धनबाद के सांसद ढुलू महतो ने मंगलवार को लोकसभा में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मियों के स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को मजबूती के साथ उठाया। उन्होंने कहा कि देश के औद्योगिक विकास में संविदा कर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए उनके कल्याण से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ विचार किया जाना आवश्यक है।
सांसद ढुलू महतो ने अतारांकित प्रश्न संख्या 659 के माध्यम से यह विषय सदन के समक्ष रखा कि सेल के विभिन्न संयंत्रों में जोखिमपूर्ण औद्योगिक कार्यों में लगे संविदा कर्मियों को भी स्थायी कर्मचारियों की भांति समुचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने पर सरकार को विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं में संतुलन से न केवल श्रमिकों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि कार्यस्थल की सुरक्षा एवं उत्पादकता को भी मजबूती मिलती है।
इस अवसर पर सांसद ने संविदा कर्मियों के लिए बेहतर एवं उपयुक्त चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने की आवश्यकता, उन कर्मियों के लिए वैकल्पिक स्वास्थ्य बीमा व्यवस्था पर विचार, जो वर्तमान वेतन सीमा के कारण ईएसआईसी (ESIC) के दायरे में नहीं आते हैं, तथा जोखिमपूर्ण कार्यों में लगे सभी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों को और अधिक सुदृढ़ किए जाने की जरूरतों को उठाया।
इस विषय पर इस्पात राज्य मंत्री भूपतिराज श्रीनिवास वर्मा ने सदन को अवगत कराया कि सेल में कार्यरत ठेका श्रमिकों के लिए समूह व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना (GPAIS) पहले से लागू है। उन्होंने यह भी बताया कि कार्यस्थल पर दुर्घटना की स्थिति में नियमानुसार सहायता एवं अनुकंपा रोजगार से संबंधित प्रावधानों को समय-समय पर सशक्त किया गया है। सरकार श्रमिकों से जुड़े सुझावों पर तथ्यों एवं प्राथमिकताओं के आधार पर विचार करती है।
इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सांसद ढुलू महतो ने कहा हमारे श्रमिक साथी देश के औद्योगिक ढांचे की रीढ़ हैं। चाहे वे स्थायी हों या संविदा पर, उनका परिश्रम और जोखिम समान होता है। मेरा निरंतर प्रयास है कि प्रत्येक श्रमिक को सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर कार्य वातावरण प्राप्त हो। सरकार और प्रबंधन के संयुक्त प्रयास से इस दिशा में सकारात्मक समाधान निकलेंगे, यही मेरी अपेक्षा है।
सांसद के इस प्रयास से सेल के बोकारो, भिलाई, राउरकेला एवं दुर्गापुर संयंत्रों में कार्यरत श्रमिकों के बीच यह विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है कि उनकी समस्याओं एवं सुझावों को संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर गंभीरता के साथ उठाया जा रहा है।




