राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास मेला का समापन‌ नवाचार और डिजिटल हेल्थ पर रहा खास जोर

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राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास मेला का समापन‌

नवाचार और डिजिटल हेल्थ पर रहा खास जोर

डीजे न्यूज, धनबाद: आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में आयोजित राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास मेला का समापन मंगलवार को हुआ।  अंतिम दिन नवाचार, शोध, उद्योग-संस्थान सहयोग और डिजिटल परिवर्तन जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई, जो भारत इनोवेट्स के विज़न को आगे बढ़ाने वाला साबित हुआ।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि का इंटरैक्टिव सत्र रहा। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है और यहां विकसित समाधान वैश्विक स्तर पर उपयोगी हो सकते हैं। उन्होंने जोर दिया कि केवल बेसिक रिसर्च तक सीमित न रहकर उसे समाज पर असर डालने वाले परिणामों में बदलना जरूरी है। साथ ही उन्होंने छात्रों को स्टार्टअप, इंटरडिसिप्लिनरी लर्निंग और इनोवेशन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

इसके बाद नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के सीईओ डॉ. सुनील कुमार बरनवाल ने “डिजिटल हेल्थ नेशन” विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों का लाभ तभी मिलेगा जब मानसिक बाधाओं, पुराने सिस्टम और क्षमता से जुड़ी चुनौतियों को दूर किया जाएगा। उन्होंने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत ABHA आईडी, डेटा शेयरिंग और यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस की अहमियत बताई। उन्होंने भरोसा, गोपनीयता और सहमति को डिजिटल हेल्थ का आधार बताते हुए इसे UPI जैसी क्रांति से जोड़ा।

दोनों सत्रों में छात्रों, शिक्षकों और उद्योग प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने बीसीसीएल के मुनीडीह अंडरग्राउंड माइंस का दौरा किया और माइनिंग ऑपरेशन्स को करीब से समझा। इसके अलावा A2B (Academia to Business) मैचमेकिंग, स्टार्टअप पिचिंग, नेटवर्किंग और 3D माइन मेटावर्स, जियोलॉजिकल म्यूजियम व सिस्मोलॉजिकल ऑब्जर्वेटरी का भ्रमण भी कराया गया।

समापन सत्र में डीन (आरएंडडी) और संयोजक प्रो. पार्थसारथी दास ने संस्थान, उद्योग, निवेशकों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया। आयोजन सचिव प्रो. एजाज अहमद ने बताया कि कार्यक्रम में 1000 से अधिक प्रतिभागियों और 190 नवाचारों की भागीदारी रही। उप निदेशक प्रो. धीरज कुमार ने “3C–3I–3M” मॉडल के जरिए सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने की बात कही।

संस्थान के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने कहा कि पांच आईआईटी के सहयोग से यह आयोजन नई ऊंचाइयों तक पहुंचा है और यह संस्थान के शताब्दी वर्ष में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वहीं, सीएसआईआर-सीआईएमएफआर के निदेशक प्रो. ए. के. मिश्रा ने इसे ऐतिहासिक आयोजन बताते हुए सतत और उद्देश्यपूर्ण नवाचार की जरूरत पर बल दिया।

इस तरह IInvenTiv 2026 ने आईआईटी (आईएसएम) धनबाद को एक प्रमुख नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करते हुए देश को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया।

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