




राज्य की पहली 8 लेन सड़क के धंसने का मुद्दा विधानसभा में उठा
विधायक राज ने गुणवत्ता और निर्माण की जांच की मांग की
डीजे न्यूज, धनबाद: धनबाद विधायक राज सिन्हा ने बुधवार को राज्य की पहली 8 लेन सड़क के धंसने का मामला विधानसभा में उठाया। उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि मंगलवार को झारखंड मोड़ से 99 कोयलांचल सिटी के बीच सर्विस लेन में धंस कर बड़ी गोफ बन गया। विधायक ने सदन में बताया कि अक्टूबर 2024 में गोल बिल्डिंग से लेकर काको मठ के बीच 20 किलोमीटर लंबी 8 लेन सड़क का उद्घाटन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया था। इतनी जल्दी लगातार लगभग तीन-चार महीने के अंतराल पर आधा दर्जन स्थानों पर यह सड़क बुरी तरह धंस चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड बैंक के लोन से बनी इस सड़क का उद्घाटन के 24 घंटे के बाद से ही धंसना शुरू है। जो अब तक जारी है । इस रोड की गुणवत्ता एवं निर्माण की अविलंब जांच कराई जाने की जोरदार मांग की। विधायक के मांग पर संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने निश्चित रूप से जल्द से जल्द जांच कराए जाने की बात कही।
विधायक ने शून्य काल के दौरान ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित मनरेगा योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु राज्य अंतर्गत सभी जिलों में लोकपाल की नियुक्ति एवं उन्हें हटाने के संबंध में अहम सवाल किया। उन्होंने पूछा की नियुक्ति के बाद विभागीय आदेश से उन्हें हटा दिया गया एवं नई नियुक्तियां नहीं होने के कारण विभाग और संवेदक की मिली भगत से मनरेगा संबंधित कार्य में अनियमितताएं और मशीनों द्वारा कार्य किया जा रहा है। जो उच्च स्तरीय जांच का विषय है। विधायक ने मांग की कि जब तक नहीं नियुक्तियां नहीं हो तब तक पूर्व के लोकपालों से कार्य लिया जाए।
विधायक ने कृषि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग से संबंधित अहम सवाल किया। उन्होंने कहा कि विभाग के द्वारा वर्ष 2024 -25 में फसल सुरक्षा कार्यक्रम योजना का क्रियान्वयन किया गया था। जिसके अंतर्गत किसानों के मध्य पौधा संरक्षण केंद्रों को स्थापित कर कीटनाशक ,फफूंदी नाशक एवं खरपतवार नाशक दवाओं का वितरण किया जाना था। फसल सुरक्षा कार्यक्रम योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 30 करोड रुपए ,वित्तीय वर्ष 2025 -26 में 21 करोड़ को घटाते हुए तृतीय वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजटीय प्रावधान 15 करोड़ कर दिया गया है। उन्होंने सवाल किया कि,किस आधार पर बजट कटौती की गई है?
विधानसभा में अल्प सूचित प्रश्न के तहत सवाल किया कि क्या यह बात सही है कि विभाग में भूमि संरक्षण पदाधिकारी और जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी का पद झारखंड सरकार की विभागीय अधिसूचना अ.स. 06/कृ. स्था./ विविध -01/2014 1683/रांची दिनांक -21/07/2022 के अनुसार कोटि- 01 (राज्य) के लिए चिन्हित किया गया है. क्या यह बात सही है कि झारखंड कृषि सेवा (भर्ती एवं प्रोन्नति) नियमावली 2013 के कंडिका 15.3 के अनुसार सिर्फ विशेष परिस्थिति में किसी एक पदाधिकारी को दूसरे कोटि में पदस्थापन किया जा सकता है. और वह भी कार्यहित को ध्यान में रखकर सीमित अवधि के लिए किया जा सकता है?
क्या यह बात सही है कि ,कोटि 01 (शश्य) कोटि -( कृषि रसायन), कोटि- 05(पौधा संरक्षण) और कोटि -07(उद्यान) मिलाकर 68 कृषि स्नातक पदाधिकारी होते हुए भी विभाग किसी विशेष परिस्थिति में कोटि -02 (कृषि अभियंत्रण) के ज्यादातर पदाधिकारी को भूमि संरक्षण पदाधिकारी और जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी के पद पर पदस्थापित कर रहे हैं?
तो क्या सरकार स्पष्ट करना चाहेगी कि वर्ष 2022 के झारखंड कृषि सेवा में चयनित पदाधिकारी में से पदाधिकारी पदस्थापन एवं स्थानांतरण नीति कृषि.स्था. -107/01-2013 कृ. सचि., रांची दिनांक 22.12.201 के कंडिका 13 के अनुसार कितने पदाधिकारी प्रशिक्षण पास किए हैं? एवं बिना प्रशिक्षण के किस आधार पर पदस्थापन की गई है?



