



पुराने गिरिडीह स्टेशन पर फटा तिरंगा फहराने पर बवाल, आपत्ति के बाद बदला गया राष्ट्रीय ध्वज

डीजे न्यूज, गिरिडीह : पुराने गिरिडीह रेलवे स्टेशन पर क्षतिग्रस्त अवस्था में राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने का मामला तूल पकड़ गया है। सामाजिक एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल ने इसे राष्ट्रसम्मान से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद रेल प्रशासन को त्वरित कार्रवाई करनी पड़ी।
15 फरवरी 2026 को स्टेशन परिसर में फहराया जा रहा तिरंगा स्पष्ट रूप से क्षतिग्रस्त पाया गया। इस पर श्री खंडेलवाल ने इसे राष्ट्रीय अस्मिता के साथ खिलवाड़ करार देते हुए पूर्व रेलवे के आसनसोल मंडल को कड़े शब्दों में पत्र भेजा। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि क्षतिग्रस्त राष्ट्रीय ध्वज को फहराना न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि यह विधि-विरुद्ध कृत्य की श्रेणी में भी आता है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पूर्व में रेल प्रशासन ने स्वयं जानकारी दी थी कि राष्ट्रीय ध्वज के दो सेट सुरक्षित रखे जाते हैं, ताकि एक के क्षतिग्रस्त होने पर तुरंत दूसरा लगाया जा सके। इसके बावजूद फटा हुआ ध्वज फहराया जाना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
श्री खंडेलवाल की आपत्ति के बाद वरिष्ठ मंडल अभियंता–2, आसनसोल मंडल ने मामले का संज्ञान लिया। पत्रांक WM/R/CPGRM दिनांक 17 फरवरी 2026 के माध्यम से सूचित किया गया कि क्षतिग्रस्त ध्वज को तत्काल प्रभाव से हटाकर उसके स्थान पर नया राष्ट्रीय ध्वज विधिवत फहरा दिया गया है।
इस प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री खंडेलवाल ने कहा कि राष्ट्रध्वज केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि देश की अस्मिता, बलिदान और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि किसी भी सार्वजनिक स्थल पर राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से समझौता हुआ तो वे इसे गंभीरता से उठाएंगे और आवश्यक कानूनी कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेंगे।
साथ ही उन्होंने रेल प्रशासन से मांग की कि आगे ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो तथा राष्ट्रीय ध्वज संहिता का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।




