


















































मकर संक्रांति मेला : पारसनाथ पर्वत पर श्रद्धा और स्वच्छता का संगम
शांति व अनुशासन की मिसाल, एक लाख से अधिक लोगों का होता है जुटान पर न तो कभी भगदड़ और न ही अप्रिय घटना


राजीव पांडेय, पारसनाथ (गिरिडीह) : पारसनाथ पर्वत जैन धर्मावलंबियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। जैन समुदाय के 24 तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों ने इसी पवित्र पर्वत से मोक्ष प्राप्त किया है। ऐसे में जैन समाज इस पर्वत के कण-कण को पूज्य मानता है।दिसंबर माह से पर्वत पर आने वाले सैलानियों और श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि होने के कारण पर्वत के वंदना पथ में नीचे से ऊपर तक गंदगी का अंबार लग गया था।

पर्वत से लौटने वाले तीर्थयात्री लगातार इसकी शिकायत धर्मशाला में कर रहे थे। तीर्थयात्रियों की इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमिटी ने मधुबन शिखरजी की सफाई व्यवस्था की देखरेख करने वाली संस्था शिखरजी स्वच्छता समिति के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद पर्वत की तलहटी से लेकर वंदना पथ तक व्यापक सफाई अभियान की शुरुआत की गई।
सफाई कार्य में स्वच्छता समिति द्वारा दर्जनों कामगारों को लगाया गया है। उच्च तकनीक की सफाई मशीनों की मदद से वंदना पथ के आसपास फैली गंदगी, प्लास्टिक बोतलें और पैकेट इकट्ठा कर बड़े थैलों में भरा जा रहा है, जिसे वाहनों के माध्यम से नीचे उतारा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि नए साल की शुरुआत से लेकर मकर संक्रांति तक लाखों श्रद्धालुओं ने पर्वत की चढ़ाई की, जिससे कई स्थानों पर गंदगी फैल गई थी। प्लास्टिक की खाली बोतलें और पैकेट जंगलों को नुकसान पहुंचा रहे थे और श्रद्धालुओं ने इसे लेकर नाराजगी भी जताई थी। समिति ने आश्वासन दिया है कि कुछ ही दिनों में वंदना मार्ग को पूरी तरह साफ और दुरुस्त कर दिया जाएगा।
इधर, कई पर्यटकों ने बताया कि सम्मेद शिखरजी मधुबन पारसनाथ का मकर संक्रांति मेला अपने आप में बेहद लोकप्रिय और शांतिपूर्ण आयोजन है। वर्षों से आयोजित इस भव्य मेले में झारखंड समेत देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन आज तक न तो किसी प्रकार की भगदड़ हुई है और न ही कोई बड़ी अप्रिय घटना सामने आई है।
उन्होंने बताया कि अब तक न कोई महिला या बच्चा खोया है। यदि कोई कुछ देर के लिए परिजनों से बिछड़ भी जाता है, तो मेला समिति के दर्जनों सक्रिय सदस्य तुरंत उसे उसके परिजनों से मिलाने में जुट जाते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि आज तक मेला परिसर में किसी भी प्रकार का झगड़ा या विवाद नहीं हुआ है।
इसका मुख्य कारण मेला समिति द्वारा मेला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में मांस और मदिरा की बिक्री पर लगाया गया पूर्ण प्रतिबंध है। यही वजह है कि लाखों की भीड़ के बावजूद मकर संक्रांति मेला पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होता है।
मेले के दौरान पर्वत के वंदना पथ के मुख्य द्वार पर महिला और पुरुष पुलिस बल की तैनाती रहती है। पर्वत पर जाने वाले श्रद्धालुओं के बैग की सघन जांच की जाती है। मादक पदार्थ या अभक्ष्य वस्तु मिलने पर उसे वहीं जब्त कर लिया जाता है। इसके अलावा वंदना मार्ग में किसी भी तरह के साउंड सिस्टम पर भी पूर्ण प्रतिबंध है।
पुलिस की सतर्कता और मेला समिति के सदस्यों के सहयोग, ईमानदारी और समर्पण का ही परिणाम है कि इतना विशाल जनसैलाब होने के बावजूद पारसनाथ का मकर संक्रांति मेला हर वर्ष अनुशासन, श्रद्धा और शांति के साथ सफलतापूर्वक संपन्न होता आ रहा है।



