



लंगटा बाबा की समाधि पर आज फिर जुटेंगे लाखों श्रद्धालु

परम संत सद्गुरु लंगटा बाबा : इनके दर पर किसी में भेद नहीं, 116 वर्षों से समाधिस्थल बना आस्था का केंद्र
डीजे न्यूज, गिरिडीह :
बीते 116 वर्षों से गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड अंतर्गत खरगडीहा स्थित परम संत सद्गुरु लंगटा बाबा का समाधि स्थल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। शनिवार को फिर यहां लाखों श्रद्धालु जुटेंगे।
देश-विदेश से लाखों भक्त यहां- प्रतिवर्ष भव्य मेला देखने आते हैं। बाबा की भक्ति में कोई भेद नहीं। राजनेता हों या किसान, व्यापारी हों या साधु, छात्र हों या आमजन, सभी पर बाबा की कृपा समान रूप से बरसती है। उनका मूल मंत्र सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया आज भी धर्मनिरपेक्षता और समाजिक सौहार्द का संदेश देता है। करीब 150 वर्ष पूर्व, 1870 के
आसपास, नागा साधुओं की मंडली हिमालय की ओर जा रही थी। उसी मंडली में एक वृद्ध साधु था, जिसे खरगडीहा से ऐसा लगाव हुआ कि
उन्होंने यहीं स्थायी निवास लिया और आगे चलकर लंगटा बाबा के नाम से विख्यात हुए।
चादरपोशी और महालंगर पर जुटती है श्रद्धालुओं की भीड़
बाबा की समाधि स्थल पर हर वर्ष पौष पूर्णिमा को विशाल मेला लगता है। इस वर्ष भी 3 जनवरी को समाधि पर्व, चादरपोशी, भंडारा और महालंगर,
आस्था : बाबा का डांटना भी कृपा का संकेत माना जाता था
बाबा की समाधि स्थल पर श्रद्धालुओं का मानना है कि उनका डांटना भी कृपा का संकेत थी। बाबा के नाम से अनेक शैक्षणिक और सामाजिक संस्थान संचालित हैं। बाबा केवल संत नहीं, बल्कि धर्मनिरपेक्ष भारत की जीवंत आत्मा हैं। उनकी साधना और जीवन आज भी यह संदेश देता है कि आस्था बांटती नहीं, जोड़ती है। खरगडीहा का यह समाधि स्थल आज भी श्रद्धा, आस्था और सौहार्द का महासंगम बनकर देशभर में मिसाल पेश कर रहा है।



