

























































लंबे और निरंतर संघर्ष से मिली जीत: भवन सिंह

डीजे न्यूज, रांची: हटिया मज़दूर यूनियन (सीटू) के अध्यक्ष भवन सिंह ने कहा कि लंबे और निरंतर संघर्ष के फलस्वरूप, “सी-ग्रेड से डी-ग्रेड में जाने पर वार्षिक वेतन वृद्धि में एक रुपये की कमी” से जुड़े मामले में ऐतिहासिक जीत हासिल हुई है। उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करने के बाद, 70 प्रभावित मज़दूरों को 52 हज़ार से 65 हज़ार रुपये तक का भुगतान वर्ष के अंतिम दिन कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि यह वही मामला है, जिसमें सबसे पहले 06 एफएफपी के कारपेंटर साथियों ने एक-एक रुपये का केस यूनियन को सौंपकर संघर्ष की शुरुआत की थी। लगभग 20 वर्षों के लम्बे संघर्ष और विभिन्न न्यायालयों से गुजरने के बाद, 27 कारपेंटर्स को भुगतान मिला। इसके बाद आईटीआई व सीटीआई प्रशिक्षुओं ने भी यूनियन के नेतृत्व में अपना मुकदमा दायर किया और हाई कोर्ट से विजय प्राप्त की।
जब भुगतान में टालमटोल किया गया, तो यूनियन ने पुनः अवमानना याचिका दायर की। परिणामस्वरूप, उच्च न्यायालय ने दिसंबर के अंत तक भुगतान करने का स्पष्ट आदेश दिया, जिसे अब अंततः प्रबंधन ने लागू कर दिया।
उन्होंने कहा कि यदि मज़दूर सीटू के साथ एकजुट होकर खड़े हों, तो छोटी से छोटी मांग हो या बड़ी — सीटू हर संघर्ष को जीत में बदलने की क्षमता रखता है।
2009–10 में सप्लाई मज़दूरों ने भी यूनियन के साथ मिलकर बहादुराना संघर्ष किया था, जिसमें ऐतिहासिक जीत मिली — न केवल मांगें मंज़ूर हुईं, बल्कि काम से निकाले गए पाँच मज़दूरों को चार वर्ष बाद पुनः काम पर बहाल कराया गया।
एकता की कमी, श्रम कानूनों की अपर्याप्त समझ और उनके सही उपयोग की अनभिज्ञता ही सबसे बड़ी बाधा बनती है।



