























































कविता, नाटक और राष्ट्रभक्ति के साथ मना 77वां गणतंत्र दिवस

डीजे न्यूज,पलामू : 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर विद्यालय परिसर देशप्रेम, भावनाओं और सांस्कृतिक चेतना से सराबोर नजर आया। सुबह 10 बजे पूर्वाह्न एचएम कन्हैया प्रसाद द्वारा झंडोत्तोलन किया गया। इसके पश्चात छात्राओं ने क्रमबद्ध रूप से राष्ट्रगान, राष्ट्रीय गीत एवं झंडागीत प्रस्तुत कर वातावरण को गरिमामय बना दिया।
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब भाषायी शिक्षिका सुषमा पांडेय ने अपनी स्वयं रचित ओजस्वी कविता का पाठ किया। “है भारत भूमि ये अपनी…” से आरंभ हुई इस रचना ने राष्ट्रप्रेम, एकता और संविधान की शक्ति को शब्दों में पिरो दिया। जैसे ही उन्होंने अंतिम पंक्तियां भावुक होकर पढ़ीं, पूरा परिसर करतल ध्वनि से गूंज उठा। कई श्रोताओं की आंखें नम थीं और भाव उच्च कोटि के।

कार्यक्रम में इसी विद्यालय से पास आउट और वर्तमान में दसवीं कक्षा के एनसीसी कैडेट बने विद्यार्थियों ने मंच पर अनुशासित परेड प्रस्तुत कर सभी को आकर्षित किया। परेड के बाद उन्होंने कहा कि इस विद्यालय से मिले शिक्षा और संस्कार को वे जीवन भर नहीं भूल सकते।

मंच पर छात्र ही कलाकार बने और देखते ही देखते रंगारंग प्रस्तुतियों से मंच सज गया। “तोड़ो नहीं जोड़ो” नाटक के माध्यम से सामाजिक एकता का संदेश दिया गया। अंगुलीमाल डाकू के बौद्ध भिक्षु बनने की कथा पर आधारित लघु नाट्य प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। फुल एक्शन और सजीव अभिनय देख अभिभावक भी दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गए।
मोबाइल के बढ़ते क्रेज पर आधारित मूक नाटक ने हास्य और संदेश का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। बच्चों की शानदार अदाकारी और सटीक हाव-भाव पर सभागार ठहाकों और तालियों से गूंज उठा। इस नाटक का लेखन और निर्देशन विदुषी शिक्षिका सुषमा पांडेय द्वारा किया गया, जिनकी रचनात्मकता और शांत व्यक्तित्व की सभी ने सराहना की।
इस अवसर पर पूर्व प्रधानाध्यापक श्रद्धेय रंजीत कुमार सिंह ने गणतंत्र दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वतंत्रता के मूल्यों को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए नैतिक एवं वैधानिक कर्तव्यों का पालन अनिवार्य है। वहीं पूर्व प्रधानाध्यापक श्रद्धेय रामेश्वर सर ने संविधान के ऐतिहासिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के पीछे 26 जनवरी 1930 के पूर्ण स्वराज आंदोलन का ऐतिहासिक संदर्भ जुड़ा है।
कार्यक्रम की मुक्त कंठ से सराहना की गई और विद्यालय परिवार को सफल आयोजन के लिए बधाई दी गई। धन्यवाद ज्ञापन एचएम कन्हैया प्रसाद ने किया और सभी आगंतुकों के प्रति आभार जताया कि उन्होंने व्यस्त समय के बावजूद अंत तक उपस्थित रहकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
कार्यक्रम में वरीय शिक्षक जुबैर अंसारी द्वारा लगाए गए जोशीले नारों से ठंड के मौसम में भी बच्चों में उत्साह की लहर दौड़ गई। इस अवसर पर शिक्षक राजेश कुमार गुप्ता, राजेश कुमार सिंहा, शिक्षिकाएं आशा कुमारी, पूनम कुमारी, पूर्व अध्यक्ष रामवृक्ष राम, संयोजिका नीलिमा सिंहा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



