

























































कोर्ट के आदेश और भाजपा के दबाव पर पेसा कानून लागू किया गया : अमर बाउरी

रघुवर दास सरकार ने पेसा कानून का ड्राफ्ट तैयार किया था, झामुमो-कांग्रेस सरकार ने इसे लंबे समय तक दबाकर रखा
गिरिडीह विधानसभा स्तरीय अटल स्मृति सम्मेलन में भाजपा नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री के योगदान को याद किया
डीजे न्यूज, गिरिडीह : पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी के अवसर पर शुक्रवार को गांधी चौक स्थित मोदी धर्मशाला में गिरिडीह विधानसभा स्तरीय अटल स्मृति सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत अटल बिहारी वाजपेयी के चित्र पर माल्यार्पण करके की गई।
समारोह के दौरान मनरेगा से गांधी जी का नाम हटाए जाने पर पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में अमर बाउरी ने कहा कि गांधी जी देश में “रामराज्य” की कल्पना करते थे और भगवान श्रीराम उनके प्रेरणा स्रोत रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि रघुवर दास सरकार में भाजपा ने पेसा कानून का ड्राफ्ट तैयार कर लिया था, लेकिन कुछ लोगों के कोर्ट जाने के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका। मौजूदा झामुमो-कांग्रेस सरकार ने इसे लंबे समय तक दबाकर रखा, पर अब कोर्ट के आदेश और भाजपा के दबाव में इसे लागू किया गया।
इधर सम्मेलन के मौके पर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने झारखंड निर्माण में अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान और प्रधानमंत्री रहते देश की प्रगति में उनके नेतृत्व को याद किया। इस दौरान अमर बाउरी ने बताया कि 25 दिसंबर को भारत रत्न वाजपेयी की 101वीं जयंती मनाई गई। शताब्दी वर्ष के तहत पूरे राज्य में एक सप्ताह तक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ने न केवल झारखंड को राज्य का दर्जा दिलाया, बल्कि पोखरण परमाणु परीक्षण और कारगिल युद्ध के दौरान देश को नई ऊंचाई पर पहुंचाया।

कार्यक्रम में पूर्व मंत्री चंद्रमोहन प्रसाद, पूर्व विधायक निर्भय कुमार शाहबादी, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुरेश साव, दिनेश यादव, प्रो विनीता कुमारी, चुन्नूकांत, विनय कुमार सिंह, प्रकाश सेठ, कामेश्वर पासवान, सुनील पासवान, मनोज सिंह, सुभाष सिन्हा, खिरोधर दास, अनूप सिन्हा, संगीता सेठ, शालिनी बैसखियार, उषा देवी, अशोक सिंह समेत कई भाजपा नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।



