



किसान-मजदूरों के हित में नहीं है लेबर कोड और नए बीज-बिजली विधेयक: सुदीप दत्ता

माकपा का छोटानागपुर स्तरीय जन आक्रोश जत्था संपन्न
किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ 24 मार्च को ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान
डीजे न्यूज, रांची: भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), झारखंड राज्य कमिटी के तत्वावधान में आयोजित छोटानागपुर स्तरीय जन आक्रोश जत्था शनिवार को सिलागाई स्थित शहीद वीर बुधु भगत की प्रतिमा पर माल्यार्पण और संकल्प के साथ प्रारंभ हुआ। यह जत्था सिलागाई चौक, चानहो ब्लॉक चौक, बिजूपाड़ा चौक, मांडर चौक, बांबे चौक, काठीटांड़ चौक, शहीद सुभाष मुंडा चौक (दलादली), धुर्वा सेक्टर-2 स्थित राजेंद्र भवन मैदान और टुपूदाना चौक से होते हुए सतरंजी चौक पर सभा हुई।
इस दौरान स्थानीय नागरिकों और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसान-मजदूर विरोधी नीतियां नहीं चलेंगी, 4 लेबर कोड, बीज और बिजली विधेयक रद्द करो, एमएसपी की कानूनी गारंटी दो, और जल-जंगल-जमीन की रक्षा करो जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। जत्थे के माध्यम से आगामी 24 मार्च को दिल्ली में आयोजित ‘जन आक्रोश रैली’ को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया गया।
सभा को संबोधित करते हुए माकपा केंद्रीय कमिटी सदस्य सह सीटू (CITU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप दत्ता ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा लाए गए 4 लेबर कोड और नए बीज-बिजली विधेयक देश के किसान-मजदूरों के लिए “मौत की घंटी” के समान हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर चर्चा करते हुए ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की और कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार का रुख भारत की पारंपरिक ‘गुटनिरपेक्षता’ की नीति को कमजोर कर रहा है।
सीटू (CITU) राज्य उपाध्यक्ष भवन सिंह ने स्थानीय मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए कहा कि राँची नगर निगम में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण में जानबूझकर देरी की जा रही है, जो श्रमिकों के हितों पर कुठाराघात है। साथ ही उन्होंने HEC (एचईसी) के संकटपूर्ण हालात के लिए केंद्र की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।
राज्य सचिव मंडल सदस्य सह झारखंड राज्य किसान सभा के महासचिव सुफल महतो, समीर दास, विश्वजीत देव, सुखनाथ लोहरा, प्रफुल्ल लिंडा, हरेंद्र सिंह और सुरेश मुंडा ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने एकजुट होकर कहा कि बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और निजीकरण ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। झारखंड की खनिज संपदा और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए अब आर-पार का संघर्ष अनिवार्य है।
इस अवसर पर राज्य कमिटी सदस्य बीणा लिंडा, मदुवा कच्छप, अमल आजाद, सुधांशु शेखर, किसान नेता ललित मुंडा, नौजवान सभा के जिला सचिव कपिल महतो, प्रतीक मिश्रा, हरेंद्र यादव, अमित मुंडा, बुधराम उरांव, सीमा केरकेट्टा, आसरिता, सिमंती कुमारी, बेंजामिन कुजूर, महेश मुंडा, नारियल होरो, छोटन देवी, संतु लिंडा, जुगनुयुस तीड़ू और कृपा खलखो सहित सैकड़ों स्थानीय लोगों व कार्यकर्ता ने भाग लिया।



