



कार्ल मार्क्स की पुण्यतिथि पर संगोष्ठी का आयोजन
शोषण मुक्त समाज के लिए मार्क्सवाद आज भी प्रभावी वैचारिक हथियार
डीजे न्यूज, रांची : महान दार्शनिक, अद्वितीय अर्थशास्त्री और क्रांतिकारी चिंतक कार्ल मार्क्स की 143वीं पुण्यतिथि के अवसर पर शनिवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की राज्य कार्यालय स्थित सफदर हाशमी सभागार में एक विशेष विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
अध्यक्षता राज्य सचिवालय सदस्य कॉमरेड प्रफुल्ल लिंडा ने की। इस अवसर पर प्रतीक मिश्रा, कॉमरेड अमल आज़ाद, कॉमरेड सुधांशु शेखर, अधिवक्ता गुलाब प्रसाद, कीर्ति मुंडा, समीर दास, किशोर चक्रवर्ती सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए।
वक्ताओं ने मार्क्स के दर्शन, राजनीतिक अर्थशास्त्र और ‘ऐतिहासिक भौतिकवाद’ की वैज्ञानिक समझ को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मार्क्स ने समाज को न केवल समझने, बल्कि उसे बदलने का जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिया, वह आज भी वैश्विक स्तर पर शोषण और अन्याय के खिलाफ संघर्षों की मशाल बना हुआ है।
संगोष्ठी में चर्चा की गई कि वर्तमान पूंजीवादी व्यवस्था, जो पूरी तरह मेहनतकश वर्ग के श्रम के शोषण पर टिकी है, निरंतर आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय संकट पैदा कर रही है। ऐसे दौर में मार्क्सवाद की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।
प्रतीक मिश्रा, अमल आज़ाद और सुधांशु शेखर ने ‘वर्ग संघर्ष’ की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि एक न्यायपूर्ण, समानतामूलक और मानव-केंद्रित सामाजिक व्यवस्था का निर्माण केवल संगठित जनसंघर्षों के माध्यम से ही संभव है।
कार्यक्रम में संतोष प्रकाश, नवीन चौधरी, सुरेश मुंडा, प्रकाश टोप्पो और रवि कुमार ने कार्ल मार्क्स को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सभा के समापन पर सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया गया कि मेहनतकश जनता के अधिकारों, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष को और अधिक व्यापक, संगठित और मजबूत बनाया जाएगा। वक्ताओं ने आह्वान किया कि शोषणकारी व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के लिए व्यापक जन-एकता कायम करना समय की मांग है।



