झारखंड आंदोलन के नायक एके सहाय नहीं रहें शिबू सोरेन एवं बिनोद बाबू के थे मित्र, झारखंड आंदोलन में दिशोम गुरू को कई बार पुलिस घेराबंदी से सुरक्षित निकाल ले गए थे

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झारखंड आंदोलन के नायक एके सहाय नहीं रहें

शिबू सोरेन एवं बिनोद बाबू के थे मित्र, झारखंड आंदोलन में दिशोम गुरू को कई बार पुलिस घेराबंदी से सुरक्षित निकाल ले गए थे
डीजे न्यूज, धनबाद : झारखंड आंदोलन के नायक एवं झामुमो के पूर्व महासचिव व दी झाकोमयू के जोनल अध्यक्ष अवध किशोर सहाय जो एके सहाय के नाम से पूरे झारखंड में प्रसिद्ध थे का शनिवार की देर रात असर्फी अस्पताल धनबाद में निधन हो गया। कुछ दिन पूर्व ही तबीयत बिगड़ने पर उन्हें उनके चीरागोड़ा स्थित आवास से असर्फी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वे करीब 85 साल के थे। एके सहाय झामुमो के संस्थापक अध्यक्ष विनोद बिहारी महतो एवं दिशोम गुरू शिबू सोरेन के मित्र थे। झारखंड आंदोलन के दौरान शिबू सोरेन को पुलिस से बचाने में उन्होंने कई बार बड़ी भूमिका निभाई थी। एके सहाय के दो पुत्रों में बड़े पुत्र अमरेंद्र उर्फ मुन्ना सहाय धनबाद के सरकारी अधिवक्ता एवं धनबाद बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हैं जबकि छोटे पुत्र अमितेश सहाय झामुमो के वरिष्ठ नेता एवं झारखंड एवं ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं।
एके सहाय के निधन की सूचना मिलते ही देर रात से ही असर्फी अस्पताल एवं उनके चिरागोड़ा स्थित आवास पर लोगों को जुटान शुरू हो गया था। धनबाद जिले के कोने-कोने से लोग अंतिम दर्शन को उमड़ रहे थे। रविवार सुबह करीब
दस बजे चिरागोड़ा स्थित उनके आवास से शवयात्रा निकलेगी। शवयात्रा वहां से उनके पैतृक आवास लालपुर फुटहा जाएगी। वहां से मुनीडीह कपाल घाट पहुंचेगी। जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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