जहां आदर, त्याग और संयम है, वहीं रामराज्य की नींव है: पं. उदय तिवारी धनुष यज्ञ से सीताराम विवाह तक गूंजा जय श्रीराम, राम कथा में भाव-विभोर धनबाद

Advertisements

जहां आदर, त्याग और संयम है, वहीं रामराज्य की नींव है: पं. उदय तिवारी

धनुष यज्ञ से सीताराम विवाह तक गूंजा जय श्रीराम, राम कथा में भाव-विभोर धनबाद

डीजे न्यूज, धनबाद:  श्री भजन गंगा समिति, धनबाद द्वारा आयोजित श्री राम कथा महोत्सव के तृतीय दिन श्री राधा कृष्ण मंदिर, शांति भवन, बैंक मोड़, धनबाद का प्रांगण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। कथा स्थल पर “जय श्रीराम” के उद्घोष और भजनों की मधुर ध्वनि के बीच ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो अयोध्या और मिथिला दोनों ही सजीव रूप में उपस्थित हों। कथा वाचक पंडित उदय तिवारी  ने भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं से लेकर धनुष यज्ञ एवं चारों भाइयों के विवाह तक की कथा का अत्यंत भावात्मक और भक्तिमय वर्णन किया, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

बाल लीलाओं में छिपा आदर्श जीवन का संदेश

पंडित उदय तिवारी ने भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि प्रभु का प्रत्येक कार्य लोक कल्याण का संदेश देता है। अल्प आयु में ही श्रीराम का गुरुकुल में प्रवेश और गुरु वशिष्ठ के आश्रम में सभी विद्याओं का सहज रूप से प्राप्त होना यह दर्शाता है कि सच्ची विद्या विनय, अनुशासन और गुरु भक्ति से ही प्राप्त होती है। उन्होंने लक्ष्मण जी को जीवंत आचार्य बताते हुए कहा कि वे जीवन भर धर्म के पथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देते हैं।

विश्वामित्र के साथ यज्ञ रक्षा और करुणा के प्रसंग

कथा वाचक ने विश्वामित्र ऋषि द्वारा राजा दशरथ से श्रीराम और लक्ष्मण को यज्ञ रक्षा हेतु बक्सर ले जाने के प्रसंग को करुणा और कर्तव्य का प्रतीक बताया। मार्ग में अहिल्या उद्धार और ताड़का वध का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रभु पतित पावन हैं, जो एक क्षण में ही जीवन को मोक्ष का मार्ग दिखा देते हैं और अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना करते हैं।

मिथिला भक्ति की नगरी और अयोध्या भगवान का नगर

कथा में बताया गया कि अयोध्या जहां भगवान का नगर है, वहीं मिथिला भक्ति की नगरी है। प्रभु श्रीराम स्वयं अयोध्या से चलकर मिथिला की धरती पर निवास कर रहे भक्तों को भगवान से मिलने का सौभाग्य प्रदान करते हैं। पुष्पवाटिका प्रसंग में श्रीराम और माता सीता का प्रथम मिलन शुद्ध भक्ति, मर्यादा और सौंदर्य का अद्भुत संगम बनकर सामने आया।

धनुष यज्ञ और सीताराम विवाह का दिव्य प्रसंग

धनुष यज्ञ प्रसंग की व्याख्या करते हुए पंडित उदय तिवारी जी ने कहा कि शिव धनुष का उठना केवल शौर्य का नहीं, बल्कि विनय, श्रद्धा और धर्म का प्रतीक है। राजा जनक को उन्होंने ज्ञान की प्रतिमूर्ति बताते हुए कहा कि उन्होंने पुत्री को कभी भोग की वस्तु नहीं माना। श्री किशोरी जानकी जी साक्षात भक्ति स्वरूप हैं। चारों भाइयों का विवाह समाज को मर्यादा, समरसता और आदर्श पारिवारिक मूल्यों का संदेश देता है। कथा में मिथिला की गाली प्रसंग के माध्यम से भक्ति रस के साथ सामाजिक भावनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति की गई।

श्रद्धालुओं की उपस्थिति से भक्तिमय हुआ वातावरण

कथा के दौरान भजनों, संकीर्तन और भावपूर्ण संवादों से श्रद्धालु देर तक “जय श्रीराम” के उद्घोष में लीन रहे। इस अवसर पर मंजू महेश्वरी, सुशील अग्रवाल, कमलेश्वर अग्रवाल, अंजू अग्रवाल, सुलोचना सांवरिया, मंजू गुप्ता, यज्ञ आचार्य पंडित श्री रविंद्र तिवारी, प्रवीण पाण्डेय, दीपक पाण्डेय, धनंजय मिश्रा, नंदकिशोर पांडे, दिनेश दुबे, अभिषेक तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

Social media & sharing icons powered by UltimatelySocial
Scroll to Top