

























































हर व्यक्ति को जीवन में बार-बार श्रीमद्भागवत कथा सुननी चाहिए

डीजे न्यूज, तेतुलमारी(धनबाद): हर व्यक्ति को जीवन में बार-बार श्रीमद्भागवत कथा सुननी चाहिए। कथा ही वह अमृत है जो मनुष्य को मृत्यु से पहले अमरता का मार्ग दिखाती है। कथा मन को निर्मल करती है, बुद्धि को जाग्रत करती है और जीवन को ईश्वर की ओर मोड़ती है। उक्त बातें कथावाचक सुरेंद्र हरीदास ने गुरुवार को कहीं। पांडेडीह के चंद्रौर बस्ती स्थित महादेव मंदिर परिसर में चल रहे श्रीमद भागवत कथा के दौरान प्रवचन में उन्होंने कहा कि
जिसे वेद और शास्त्रों ने स्वीकार किया हो हमें उसकी पूजा करनी चाहिए। जो पूजा वेदसम्मत नहीं है, वह केवल भ्रम है। इधर-उधर की पूजा-पाठ, टोटके या किसी भी प्रकार के अंधविश्वास में विश्वास नहीं करना चाहिए। ये सब मन को भटकाते हैं, भगवान की ओर नहीं ले जाते।
कथावाचक ने कहा कि बचपन वह अवस्था है जब मन निर्मल, हृदय निष्कपट और विचार पवित्र होते हैं। ऐसे समय में किया गया भजन, कथा-श्रवण या सत्संग केवल एक कर्म नहीं होता, वह संस्कार का बीज होता है, जो आगे चलकर जीवन के हर क्षेत्र में शुभ फल देता है।
जो माता-पिता अपने बच्चों को कथा श्रवण कराते हैं, वे उन्हें केवल धर्म नहीं दे रहे, बल्कि एक दिव्य जीवन दृष्टि दे रहे हैं। कथा का श्रवण करने से बच्चों के मन में ईश्वर के प्रति श्रद्धा, माता-पिता के प्रति आदर और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव जाग्रत होता है। धर्म की रक्षा करनी चाहिए, धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए और अपने जीवन में ईश्वर के आदर्शों को स्थापित करना चाहिए।
प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में ऐसा कर्म करना चाहिए जो मृत्यु के बाद भी उसका कल्याण करे। उन्होंने बताया कि मरनशील मनुष्य को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। कथा सुनने से हृदय शुद्ध होता है, मन को ज्ञान मिलता है और जीवन की दिशा सही होती है।
कथा को सफल आशीष वर्मा, आशा वर्मा, धनंजय सिंह, श्रवण वर्मा, विरजु बाउरी, देवेन्द्र नाथ वर्मा, उर्मिला सिंह, संजय वर्मा, सरोज वर्मा, प्रमोद वर्मा, किशोरी वर्मा , प्रदीप वर्मा आदि के सहयोग से किया जा रहा है।



