

























































हाई-स्ट्रेंथ रिइनफोर्समेंट बार्स पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ

डीजे न्यूज, धनबाद:आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से “कंक्रीट स्ट्रक्चर्स में हाई-स्ट्रेंथ रिइनफोर्समेंट बार्स के उपयोग में प्रगति” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ गुरुवार को सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया सेमिनार हॉल में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य आधुनिक रिइनफोर्समेंट तकनीकों की समझ बढ़ाना और उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करना है।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। कार्यशाला संयोजक प्रो. प्रणेश रॉय ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि हाई-स्ट्रेंथ सामग्री आज की इंजीनियरिंग की जरूरत है और ऐसे आयोजन ज्ञान व अनुभव को साझा करने का बेहतर मंच देते हैं।
इसके बाद सिविल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो. श्रीनिवास पासुपुलेती ने विभाग की गतिविधियों और शोध कार्यों की जानकारी दी। टाटा स्टील के प्रोडक्ट एप्लिकेशन ग्रुप के सीनियर टेक्नोलॉजिस्ट नजमुल हुसैन ने कार्यशाला का ओवरव्यू देते हुए कहा कि नई पीढ़ी के रिइनफोर्समेंट बार्स संरचनाओं की मजबूती और सुरक्षा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
डीन (कंटीन्यूइंग एजुकेशन) प्रो. केका ओझा ने अपने संबोधन में कहा कि केवल सैद्धांतिक ज्ञान काफी नहीं है, उसका वास्तविक प्रयोग तभी संभव होता है जब उद्योग और संस्थान साथ मिलकर काम करें। उन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों से सीख को अपने कार्यक्षेत्र में लागू कर देश की आधारभूत संरचनाओं को मजबूत बनाने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के डिप्टी डायरेक्टर प्रो. धीरज कुमार ने उद्घाटन भाषण देते हुए कहा कि कार्यशाला का यह दूसरा संस्करण उद्योग के साथ संस्थान के बढ़ते सहयोग को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि हाई-स्ट्रेंथ रिइनफोर्समेंट बार्स संरचनाओं को अधिक सुरक्षित बनाने में बहुत महत्वपूर्ण हैं और यह विषय समयानुकूल और अत्यंत उपयोगी है।
कार्यक्रम में श्रीराम सेल्स धनबाद के बिज़नेस मैनेजर आशिष बंसल सहित सभी अतिथियों का सम्मान किया गया। सह-संयोजक प्रो. राहुल भारतीया ने धन्यवाद ज्ञापन पेश किया। उद्घाटन सत्र राष्ट्रगान और हाई-टी के साथ समाप्त हुआ।
उद्घाटन के बाद दिन भर विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें संरचनात्मक विफलताओं, स्ट्रक्चरल हेल्थ मॉनिटरिंग, भूकंपरोधी डिजाइन और प्रयोगशाला डेमो से जुड़े विषय शामिल रहे।
कार्यशाला के दूसरे दिन 14 नवंबर को भूकंपीय सुरक्षा, टिकाऊ निर्माण सामग्री, भूमिगत जांच तकनीकों तथा हाई-ग्रेड स्टील के व्यावहारिक उपयोग पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। दिन का समापन वैलेडिक्टरी सत्र के साथ होगा।



