गरीबों पर होने वाले जुल्म के खिलाफ अकुलाहट से लिबरेशन से जुड़े थे महेंद्र सिंह

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गरीबों पर होने वाले जुल्म के खिलाफ अकुलाहट से लिबरेशन से जुड़े थे महेंद्र सिंह

बलिदान दिवस पर बगोदर में शुक्रवार को होगी संकल्प सभा, बिरनी से हजारों लोग पहुंचेंगे : रामू बैठा 

डीजे न्यूज, बिरनी (गिरिडीह) : बगोदर के विधायक रहे महेंद्र सिंह के बलिदान दिवस पर 16 जनवरी को बगोदर में झारखंड संकल्प सभा होगी। झारखंड संकल्प सभा को सफल बनाने के लिए बिरनी के विभिन्न गांव में पूरी तैयारी कर ली गई है। भाकपा माले जिला कमेटी सदस्य सह प्रमुख रामू बैठा ने बुधवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि झारखंड संकल्प सभा की पूर्व संध्या पर हर क्षेत्र में मशला जुलूस, मोटरसाइकिल जुलूस निकाल ग्रामीणों को झारखंड संकल्प सभा मे जाने की अपील की जाएगी। 16 जनवरी को बिरनी पार्टी कार्यालय में सबसे पहले महेंद्र सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि दी जाएगी। उसके बाद बिरनी से हजारों की संख्या में बगोदर संकल्प सभा मे भाग लेने के लिए लोग रवाना होंगे। उन्होंने कहा गरीबों पर होने वाले जुल्म के खिलाफ अकुलाहट के कारण महेंद्र सिंह 1978 में सीपीआई एमएल लिबरेशन से जुड़े और गरीबों के हित मे संघर्ष करना शुरू कर दिए। इस दौरान कई बार उन्हें जेल जाना पड़ा था। एकत्रित बिहार में वर्ष 1990 से लेकर 2000 तक बगोदर विधान सभा क्षेत्र से लगातार विधायक के रूप में निर्वाचित हुए। बिहार से झारखंड के अलग होने के बाद भाकपा माले के एक मात्र विधायक होने के बाद भी विधान सभा में जनता के सवालों को मुखर रूप रखने के मामले में अगुआ प्रतिनिधि बने थे। जनता के संघर्ष पर उनकी आवाज को विरोधियों ने 16 जनवरी 2005 को बगोदर विधान सभा क्षेत्र के दुर्गी धवेया गांव में जननायक महेंद्र सिंह की गोली मार हत्या कर दी गई।

रामू बैठका ने कहा कि महेंद्र सिंह ने सम्प्रदायिकता, फासीवाद, जातिवाद और भ्र्ष्टाचार से कभी समझौता नहीं किया । जेल से लेकर बाहर तक खेत और खलिहानों तक लगातार गरीब मजदूर किसान पिछड़ा शोषित वर्ग के लिए लड़ाई लड़ते रहे। अब भी झारखंड में अनमोलन रत्न की कमी महसूस की जा रही है। लगतार लोकतंत्र पर हमले बढ रहे हैं। लोगों की आजादी छीनी जा रही है। देश के किसानों, शिक्षित नौजवानों पर गोलियां चलाई जा रही है। ऐसी स्थिति में क्रांतिकारी संघर्ष और मजबूत करने के लिए महेंद्र सिंह का ही रास्ता विकल्प हो सकता है। आज के दौर में नेता, विधायक की पहचान दूर से ही होने लगती है लेकिन महेंद्र सिंह विधायक रहने के बाद भी भीड़ में जनता के बीच आम आदमी की तरह जीते थे। अगर किसी को महेंद्र सिंह की जरूरत हो तो लोगो को पूछना पड़ता था की कौन है महेंद्र सिंह। वे अपनी सभाओं में कहते भी थे कि उनके लोग जन सवालों से समझौता नही कर सकते। वे समझौतावादी राजीति के विरोधी थे।

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