



ग्रामीणों ने किया जनसुनवाई में हंगामा, बीसीसीएल पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप
परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए आयोजित किया था जनसुनवाई
डीजे न्यूज, कतरास(धनबाद): बाघमारा के डुमरा स्थित बीसीसीएल सामुदायिक भवन में सोमवार को मधुबन कोलियरी परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु आयोजित जनसुनवाई में ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया। मधुबन, सिदपोकी और केशरगढ़ गांव के ग्रामीणों ने बीसीसीएल प्रबंधन और इंदुकुरी आउटसोर्सिंग कंपनी के खिलाफ खुलकर विरोध दर्ज कराया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई थानों की पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस की मौजूदगी में हुई सुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बीसीसीएल प्रबंधन की कथनी और करनी में भारी अंतर है। ग्रामीणों ने कहा कि सिदपोकी और केशरगढ़ बस्तियों का निरीक्षण करने पर यह साफ दिखता है कि वादे पूरे नहीं हुए। ग्रामीणों ने साफ कहा कि वे अपनी जमीन बीसीसीएल को सौंप सकते हैं, लेकिन किसी भी हाल में आउटसोर्सिंग कंपनी को नहीं देंगे। उनकी मांग रही कि बीसीसीएल खुद जमीन के बदले मुआवजा, नियोजन और सामूहिक पुनर्वास की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित करे। विरोध कर रहे ग्रामीणों का आरोप था कि परियोजना से संभावित दुष्परिणामों और बचाव कार्यों की जानकारी प्रबंधन ने साझा नहीं की। परियोजना के अनुसार, 393.77 हेक्टेयर भूमि पर 1.5 मिलियन टन प्रतिवर्ष क्षमता से कोयला उत्पादन 67 वर्षों तक चलेगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भूमि के नीचे पाए जाने वाले खनिज संसाधन पर सरकार का अधिकार है और जनता की सहभागिता के बिना कोई कार्य संभव नहीं। अपर समाहर्ता ने कहा ग्रामीणों की पूरी बात सुनी गयी और लिखित रूप
से अंकित भी की गयी। इसके बावजूद किसी को कुछ कहना है तो
लिखित रूप से दे सकते हैं। ग्रामीणों से लिखित आपत्तियां देने को कहा और आश्वासन दिया कि अगली बैठक में पुनर्वास योजना, प्रभावित परिवारों को बसाने का स्थान और तरीका पर विस्तार से चर्चा होगी। यह
सुनवाई पर्यावरणीय स्वीकृति को लेकर है। बीसीसीएल अधिकारियों ने कहा कि परियोजना शुरू होने पर प्रभावित परिवारों को समुचित लाभ और रोजगार दिया जाएगा। स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने का वादा किया गया। बैठक में एडिशनल कलेक्टर धनबाद विनोद कुमार, जेएसपीसीबी के विवेक कुजूर, पर्यावरण विशेषज्ञ कुंदन दास, एरिया वन जीएम के.के. सिंह, एजीएम काजल सरकार, परियोजना पदाधिकारी टी.एस. चौहान और कंपनी की ओर से कई अधिकारी मौजूद रहे। इन अधिकारियों ने परियोजना की रूपरेखा प्रस्तुत की और राष्ट्रहित में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि विरोध को नियमसंगत तरीके से व्यक्त किया जाए, ताकि सभी मुद्दों का बेहतर समाधान हो सके।




