गिरिडीह +2 उवि : चार दिन घर पर वेटिंग, दो दिन क्लास का मौका

Advertisements

गिरिडीह +2 उवि : चार दिन घर पर वेटिंग, दो दिन क्लास का मौका
1वीं आर्ट्स में 1250 नामांकन, क्लासरूम सिर्फ एक
सप्ताह में दो दिन ही मिल रहा पढ़ाई का मौका
डीजे न्यूज, गिरिडीह : ट्रेन में सीट न मिलने पर वेटिंग की बात तो आपने खूब सुनी होगी, लेकिन गिरिडीह के सबसे बड़े सरकारी विद्यालय में अब पढ़ाई भी वेटिंग लिस्ट के सहारे हो रही है। हाल यह है कि +2 उच्च विद्यालय में नामांकन के बाद 11वीं आर्ट्स के छात्र-छात्राओं को चार दिन घर पर रहना पड़ता है और केवल दो दिन क्लास करने का मौका मिलता है। डिग्री कॉलेजों में इंटर नामांकन बंद होने के बाद यहां अप्रत्याशित संख्या में छात्रों का नामांकन हुआ, जिससे स्कूल की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
1250 बच्चों का नामांकन, एक ही क्लासरूम
विद्यालय में 11वीं आर्ट्स में अब तक 1250 छात्र-छात्राओं का नामांकन हो चुका है। जबकि क्लासरूम सिर्फ एक है, जिसमें मुश्किल से 100 से 120 छात्रों के बैठने की व्यवस्था है। नतीजतन, प्रबंधन को रोल नंबर के आधार पर सप्ताह में दो दिन की पढ़ाई तय करनी पड़ी है।
लड़कियां (रोल नंबर 1–300) : सोमवार व मंगलवार
लड़कियां (रोल नंबर 301 से ऊपर) : शुक्रवार व शनिवार
लड़के : बुधवार व गुरुवार
इसके बावजूद कई बार अतिरिक्त छात्र आ जाते हैं और उन्हें बाहर ही रहना पड़ता है।


साइंस व कॉमर्स में नहीं समस्या
यह समस्या केवल आर्ट्स संकाय तक सीमित है। 11वीं साइंस में 162 और कॉमर्स में 155 छात्रों ने नामांकन कराया है। वहीं 12वीं आर्ट्स में 275, साइंस में 90 और कॉमर्स में 92 छात्र-छात्राएं हैं। आर्ट्स के 11वीं व 12वीं मिलाकर कुल 1550 छात्र हैं, लेकिन इस संकाय में शिक्षक केवल तीन ही हैं।
क्या कहते हैं प्राचार्य व शिक्षक
विद्यालय के प्राचार्य दयानंद कुमार ने बताया कि डिग्री कॉलेजों में इस वर्ष से इंटर नामांकन बंद होने के कारण 11वीं आर्ट्स में रिकॉर्ड संख्या में छात्र-छात्राओं ने नामांकन लिया। बैठने की जगह न होने से विवश होकर सप्ताह में दो दिन बुलाना पड़ रहा है। उपायुक्त की स्वीकृति से स्कूल परिसर में चार बड़े और दो छोटे कमरे का निर्माण हो रहा है। भवन तैयार होते ही बच्चों को नियमित क्लास मिलेगा।
आर्ट्स भूगोल शिक्षक प्रदीप कुमार दास ने कहा किशुरुआत में तो बच्चे आते थे और जगह न होने के कारण बिना क्लास किए लौट जाते थे। इसके बाद मजबूरी में दिन तय कर दिया गया। बावजूद इसके कई बार ज्यादा बच्चे आने से कुछ को बाहर ही रहना पड़ता है।
छात्रों की दिक्कतें
तलुम मुर्मू, छात्र 11वीं आर्ट्स : हर दिन क्लास करने की इच्छा होती है, लेकिन सप्ताह में सिर्फ दो दिन ही मौका मिलता है।
चंदन कुमार दास, छात्र 11वीं आर्ट्स : लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग दिन तय है। मेरी बारी बुधवार और शुक्रवार को आती है।

Social media & sharing icons powered by UltimatelySocial
Scroll to Top