डहरे टुसू पर्व पर धनबाद में निकली भव्य  शोभायात्रा, दिखी कुड़मि संस्कृति की झलक

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डहरे टुसू पर्व पर धनबाद में निकली भव्य  शोभायात्रा, दिखी कुड़मि संस्कृति की झलक

डीजे न्यूज,  धनबाद :डहरे टुसू पर्व पर बुधवार को सरायढेला दुर्गा मंडप से रणधीर वर्मा चौक तक हजारों की संख्या में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। ढोल, ढाक व मांदर की थाप के साथ डीजे की धुन में टुसू गीतों पर पारंपरिक वेशभूषा में महिलाएं, युवती व पुरुष नृत्य करते हुए शोभा यात्रा में चल रहे थे।
रणधीर वर्मा चौक पर टुसू गीतों पर सभी नें जमकर नृत्य किया। वृहद झारखंड कला संस्कृति मंच सरायढेला के तत्वावधान में आयोजित शोभा यात्रा में धनबाद, बोकारो के अलावा कई जगहों के लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम में 30 से अधिक छोटे-बड़े टुसू चौड़ल शामिल थे।  लोगों ने हाथों में पीला झंडा व सिर पर पीला पगड़ी पहनकर झूमते नजर आए। मंच के हीरालाल महतो ने
बताया कि टुसू शोभायात्रा का चौथा वर्ष है। शोभायात्रा कुड़माली संस्कृति काे बढ़ावा देने के लिए निकाली गई। शोभायात्रा को अगले वर्ष और भी भव्य तरीके निकली जाएगी।

आर्कषण का केंद्र:

टुसू शोभायात्रा के शुरुआत में धान की बालियाें से बना करीब 25 फीट ऊंचा  चौड़ल लोगों को अपनी ओर माेह रही थी। इसके अलावा छऊ नृत्य पूरी तरह आर्कषण का केंद्र बना रहा। विभिन्न गीतों पर नृत्य प्रस्तुत किया गया, जो चौक पर आर्कषण का केंद्र बना रहा। वहीं, कई पुरुष, महिलाएं व युवितियों ने भी छऊ नृत्य में शामिल हुए और समां बांधा।

कुड़मि संस्कृति, कृषि परंपरा और लोक चेतना का भव्य उत्सव

टुसू परब कुड़मि समुदाय की हजारों वर्षों पुरानी 13 मासे – 13 पर्व की सांस्कृतिक परंपरा का अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व केवल कुड़मि समाज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वर्तमान समय में कुड़मि समुदाय के साथ रहने वाले अन्य समुदायों द्वारा भी हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया जाता है।
छोटा नागपुर पठार में मानव जीवन का आधार सदैव धान रहा है। कुड़मि समुदाय, जो छोटा नागपुर पठार का प्रथम कृषक जनजाति माना जाता है, ने पूरे धान कृषि चक्र को अपनी संस्कृति, परंपरा और लोकजीवन में गहराई से पिरोया है।
धान जब खेतों में होता है तो उसे धानी, खलिहान में होने पर ड़िनि और जब वह घर में आ जाता है तो उसे टुसु कहा जाता है। टुसु को कुड़मि समाज में बेटी का दर्जा प्राप्त है।
अगहन माह की संक्रांति के दिन टुसु की स्थापना की जाती है तथा पूस माह की संक्रांति पर भावनात्मक विदाई दी जाती है। टुसु की विदाई में प्रयुक्त पालकी स्वरूप को चौड़ल कहा जाता है।

 

कार्यक्रम में ये थे शामिल

गणपत महतो, अजीत महतो, संतोष महतो, मनोज महतो, मिथुन महतो, नरेश महतो, टुनटुन महतो, उत्तम महतो, प्रदीप महतो, रंजीत कुमार, सुशील महतो आदि मौजूद थे।

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