



धनबाद मेयर की कुर्सी अनारक्षित होने से भड़का दलित समाज, गुरुवार को प्रदर्शन

झारखंड सरकार ने दलितों को किया अपमानित, चुप नहीं बैठेंगे : दिलीप राम
कोर्ट का फैसला आने के पहले चुनाव कराने की फिराक में है सरकार : शांतनु चंद्रा
डीजे न्यूज, धनबाद : धनबाद के दलित संगठनों के नेताओं ने मंगलवार को संयुक्त रुप से सर्किट हाउस में प्रेस कन्फ्रेंस कर आरोप लगाया है कि नगर निकाय चुनाव में सरकार ने दलितों के साथ धोखा किया है। धनबाद का मेयर पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था, उसे अनारक्षित कर तमाम अनुसूचित जाति के लोगों के साथ बेईमानी की गई है। सरकार ने एक तरह से अनुसूचित जाति को अपमानित किया है। हम इस अपमान को बर्दाश्त करने वाले नहीं हैं। धनबाद का मेयर पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित करने की मांग को लेकर तमाम दलित संगठन 22 जनवरी को विरोध प्रदर्शन करेगा। हजारों लोग इसमें शामिल होंगे।
रविदास समाज संघर्ष समिति के संस्थापक दिलीप राम ने इस मौके पर पत्रकारों को बताया कि वर्ष 2022 में झारखंड सरकार ने नगर निगम (नगरपालिका) संशोधन विधेयक झारखंड विधानसभा में पारित किया था। इसमें आबादी के आधार पर में मेयर पद का आरक्षण नगर पालिका (संशोधन) विधेयक में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्यन्त पिछड़ा वर्ग के लिए रोटेशन सिद्धांत संबंधित प्रावधान को मेयर या अध्यक्ष पद के लिए हटा दिया गया था, और संबंधित जाति की जन संख्या के आधार पर क्षेत्र में मेयर और अध्यक्ष की सीटें निर्धारित की गई थी, जिसमें धनबाद में मेयर पद अनुसूचित जाति
के लिए आरक्षित किया गया था, और राज्यपाल ने इस पारित विधेयक को मंजूरी दी थी। लेकिन यही झारखण्ड सरकार
हमारे हक को छिनकर धनबाद के धन-कुबेरों के हाथों सौंपने का काम कर रही है जिससे हम दलित समाज ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। इसलिए हम तमाम दलित संगठनों ने एक एक साथ मिलकर 22 जनवरी को धनबादमें विरोध प्रदर्शन कर अपनी मांगों को रखेंगे। वहीं धनबाद के लोकप्रिय समाजसेवी शांतनु चंद्रा ने कहा कि हमलोग
बाबा साहेब को मानने वाले और संविधान पर विश्वास रखने वाले लोग हैं, इसलिए हमलोग सरकार के इस दलित विरोधी निर्णय के खिलाफ न्यायालय के माध्यम से लड़ रहे हैं। न्यायालय में अभी भी मामला चल रहा है। झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला अभी सुरक्षित रखा है, लेकिन झारखंड सरकार कोर्ट का फैसला आने के पहले चुनाव की घोषणा कराने की फिराक में है। इसलिए, हमलोग मजबूरन सड़क पर उतरकर विरोध करने के लिए बाध्य हैं। झारखंड सरकार दलितों को उनका हक दे, यही हमलोग चाहते हैं। धनबाद में अभी भी अनुसूचित जाति की संख्या सबसे अधिक है। इस मौके पर सतीश रजक, रामचंद्र राम, बबलू दास, शिव शंकर प्रसाद, अजय हाड़ी, अजय बाउरी, सूरज कुमार पासवान, राजेश राम, मंटू दास, मुकेश पासवान, मुकुंद कुमार पासवान, मनोहर दास, बबलू पासवान, धीरज पासवान आदि उपस्थित थे।



