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नेत्र जांच शिविर में की गई 79 लोगों की जांच
डीजे न्यूज, धनबाद: राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत गुरुवार को जिला परिवहन कार्यालय में फ्री आई चेक अप कैंप लगाया गया। इसमें 79 लोगों के नेत्र की जॉच की गई।
मौके पर जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक सुनील कुमार, रोड इंजीनियरिंग एनालिस्ट अमरेश कुमार, आईटी असिस्टेंट देवेन्द्र कुमार, एएसजी आई होस्पीटल की तरफ से एरिया सेल्स मैनेजर रवि कुमार सिन्हा, सिनीयर ऑप्टोमेट्रिस्ट संजय कुमार रजक, मार्केटिंग एक्जिक्यूटिव गोपाल कुमार व अन्य लोगों उपस्थित थे।
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उपायुक्त ने की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की समीक्षा
धनबाद: उपायुक्त आदित्य रंजन ने गुरुवार को समाहरणालय के सभागार में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की समीक्षा की।
उपायुक्त ने कहा कि इसका उद्देश्य जन्म से 18 वर्ष की आयु तक के बच्चों के लिए व्यापक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना है। जिसमें जन्मजात दोषों, बीमारियों, पोषण संबंधी कमियों की शुरुआती पहचान करना और बच्चे का संपूर्ण इलाज कराना शामिल है। उन्होंने जिले के सभी 31 आयुष मेडिकल ऑफिसर को अपने-अपने क्षेत्र में भ्रमणशील रहकर ऐसे नवजात शिशुओं की व्यापक जांच करके उनका संपूर्ण इलाज कराने का निर्देश दिया। साथ ही आंगनबाड़ी और स्कूलों में मोबाइल हेल्थ टीम तथा घर पर जन्म लेने वाले बच्चों की आशा कार्यकर्ताओं द्वारा जाँच कराने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम बच्चों के जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार लाने और समुदाय के सभी बच्चों को व्यापक देखभाल प्रदान करने का एक कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य बच्चों में कमियों का शीघ्र पता लगाना और सर्जरी सहित निःशुल्क उपचार और प्रबंधन प्रदान करना है।
बैठक में उप विकास आयुक्त सन्नी राज ने कहा कि सभी बच्चों का विद्यालय के अनुसार डाटा संग्रहित करें। इससे बच्चों को खोजने में आसानी होगी। इसके अलावा बीमारी से ग्रसित एक भी बच्चा उपचार से वंचित नहीं रहेगा।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में तंत्रिका नलिका दोष, डाउन्स सिन्ड्रोम, होंठ और तालू में दरार, केवल तालू में दरार, टैलिप्स (क्लब फुट), कूल्हे का विकासात्मक डिसप्लेसिया, जन्मजात मोतियाबिंद, जन्मजात बहरापन, जन्मजात हृदय रोग, समयपूर्व जन्म की रेटिनोपैथी कमियों, एनीमिया, विशेषकर गंभीर एनीमिया, विटामिन ए की कमी, विटामिन डी की कमी, गंभीर तीव्र कुपोषण, बचपन की बीमारियाँ, त्वचा संबंधी समस्याएं (खुजली, फंगल संक्रमण और एक्जिमा), मध्यकर्णशोथ, रुमेटिक हृदय रोग, प्रतिक्रियाशील वायुमार्ग रोग, दंत क्षय, ऐंठन संबंधी विकार, विकास में होने वाली देर सहित जन्म के समय 32 कमियों को शामिल किया गया है।
उपायुक्त में सभी आयुष मेडिकल ऑफीसरों को बच्चों के इलाज पर ध्यान केंद्रित रखने, जितने बच्चों को इलाज की जरूरत है उनका पूरा विवरण उपलब्ध कराने और बच्चों का बेहतरीन इलाज सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया।
बैठक में उपायुक्त आदित्य रंजन, उप विकास आयुक्त सन्नी राज, सिविल सर्जन डॉ आलोक विश्वकर्मा, डॉ रोहित गौतम, सभी आयुष मेडिकल ऑफिसर मौजूद थे।



