



छाई भुवन मोहिनी, सुदीप भोला और डॉ. अनिल चौबे की धूम
कविता, व्यंग्य और ठहाकों से गूंजा धनबाद क्लब
हिंदी साहित्य विकास परिषद ट्रस्ट ने किया भव्य हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन
डीजे न्यूज, धनबाद : हिंदी साहित्य विकास परिषद ट्रस्ट एवं धनबाद क्लब ने रविवार की शाम शहर के धनबाद क्लब में हास्य भरी शाम का भव्य आयोजन किया। साहित्य विकास परिषद इस बार की हास्य का उत्सव हास्य कवियों के साथ मनाया जिसमें देश के नामचीन कवियों ने सभी को खबू हंसाया।


सुप्रसिद्ध विश्व विख्यात कवित्री भुवन मोहिनी उज्जैन के हास्य एवं प्रेम गीत से धनबाद क्लब गूंज उठा। वही जबलपुर से पधारे सुदीप भोला ने हास्य की फुलझड़ियां लोगों पर छोड़ी। वाराणसी से पधारे हास्य सम्राट डॉ अनिल चौबे ने अपनी हास्य कविताओं से शहर वासियों को हँसाया। इस मौके पर हिंदी साहित्य विकास परिषद के अध्यक्ष व गोल इंस्टीच्यूट के धनबाद सेंटर के निदेशक संजय आनंद एवं सचिव राकेश शर्मा ने साहित्य विकास परिषद की उपलब्धियां का गुणगान किया।

राकेश शर्मा ने बताया कि सितंबर माह में हिंदी साहित्य विकास परिषद एक कहानी संग्रह का लोकार्पण करने जा रही है जिसमें झारखंड के सभी कहानीकारों से कहानी आमंत्रित की जा रही है। वहीं सुप्रसिद्ध कवियत्री डॉ भुवन मोहिनी ने तन हो सर पे जब छप्पर तो सावन क्या बिगड़ेगा, दुपट्टा हो बदन पे जो दुशासन क्या बिगड़ेगा, तुम्हें सौगंध मर्यादा की जो लक्ष्मण ने खींची थी, वो रेखा पार मत करना तो रावण क्या बिगड़ेगा। करते क्या साजना बिन तुम्हारे नयन, देखते ही रहे चाँद तारे नयन। गुजरी यादें नमक में भिगोते रहे, और फिर सो गये थक के हारे नयन पाठ कर सभी काे मुग्ध कर दिया।


वहीं सुदीप भोला ने अपनी कविता पापा ने हैप्पी बद्दे पर मोबाइल दिलवाया था,ऑनलाइन हो गई पढ़ाई, किश्तों पर मंगवाया था, पढ़ो बेटियों बढ़ो बेटियों उनने मन में ठाना था, दुनियां कर लेगी मुट्ठी में दुनिया को दिखलाना था, उसी मोबाइल से वो लड़की इंस्टाग्राम चलाती है, पढ़ती नहीं पढ़ाती है दिन भर रील बनती से मन मोह लिया। डॉ अनिल चौबे ने राजकीय वैभव विलास नहीं बाँध पाये, विदुर की प्रीति पहुनाई बाँध देती है। छप्पनों प्रकार भोग फींके लगते हैं जब तंडुल सुदामा की मिताई बाँध देती है। वैसे तो अनादि हैं अनंत है स्वरूप किन्तु अपने पदों में मीरा बाई बाँध देती है। कौरव, सभा में जिसे बाँध नहीं पाये उसे ऊखल में यशुमति माई बाँध देती है।




