बच्चों के भोजन की गुणवत्ता से समझौता नहीं : शबनम परवीन

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बच्चों के भोजन की गुणवत्ता से समझौता नहीं : शबनम परवीन

आंगनबाड़ी और स्कूलों का निरीक्षण, राशन डीलर की जांच

डीजे न्यूज, गिरिडीह: झारखंड राज्य खाद्य आयोग की प्रभारी अध्यक्ष शबनम परवीन ने गिरिडीह जिले में विभिन्न योजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने आंगनबाड़ी नर्सरी स्कूल, पुरनी चितरपुर और उत्क्रमित मध्य विद्यालय, विशुनपुर, धनवार का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र में उपलब्ध मूलभूत सुविधाएं, बच्चों की उपस्थिति, बच्चों को मिल रही भोजन की सामग्री और गुणवत्ता आदि का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान प्रभारी अध्यक्ष ने कहा कि बच्चों के लिए भोजन की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा। साथ ही PMMVY से संबंधित लाभ लाभुकों को स-समय मिल सके, यह सुनिश्चित करने का निर्देश सेविका को दिया गया। कुपोषित बच्चों को कुपोषण उपचार केंद्र में भर्ती कराने हेतु बच्चों की माताओं को प्रेरित करने का भी निर्देश दिया गया।

इसके अलावा प्रभारी अध्यक्ष ने निर्देश दिया कि जो बच्चे अंडा नहीं खाते हैं, उन्हें मौसमी फल दें एवं मेन्यू का दीवार लेखन सही ढंग से कराएं। विद्यालय के बच्चों को आयोग का व्हाट्सएप नंबर भी उपलब्ध कराते हुए, शिकायत होने पर शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया गया।

इसके पश्चात राशन डीलर गुलाम हुसैन अंसारी, पंचायत लालबाजार, राजधनवार, गिरिडीह का स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान दुकान पर सूचना पट्ट अंकित पाया गया। डीलर द्वारा लाभुकों को पर्ची दिए जाने एवं लाभुकों को किसी प्रकार की शिकायत नहीं होने की बात कही गई। आयोग की प्रभारी अध्यक्ष द्वारा जिले के सभी राशन दुकान में आयोग का व्हाट्सएप नंबर अंकित कराने का निर्देश दिया गया।

इसके बाद कुपोषण उपचार केंद्र, राजधनवार, गिरिडीह का स्थलीय निरीक्षण किया गया। केंद्र में कुल 10 बेड की क्षमता है, वर्तमान में कुल 3 बच्चे भर्ती पाए गए। केंद्र में भर्ती बच्चों की माताओं द्वारा सही ईलाज होने, प्रतिदिन भोजन मिलने एवं प्रतिदिन 130 रुपए की राशि मिलने की बात कही गई।

इसके पश्चात परिसदन भवन, गिरिडीह में जिले के अधिकारियों के साथ झारखण्ड राज्य आकस्मिक खाद्यान्न कोष से संबंधित समीक्षात्मक बैठक की गई। बैठक के दौरान आयोग में दर्ज लंबित शिकायतों की प्रति संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराते हुए कार्रवाई सुनिश्चित करने एवं कृत कार्रवाई से आयोग को 15 दिनों के सूचित करने का निर्देश दिया गया।

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