



असर्फी अस्पताल में शव रोकने का मामला विधानसभा में गूंजा
विधायक रागिनी ने सरकार से मांगा जवाब
डीजे न्यूज, धनबाद: बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को झरिया विधायक रागिनी सिंह ने असर्फी अस्पताल में शव रोकने के मामले को उठाते हुए सरकार से सवाल किया।
विधानसभा में सूचना के माध्यम से मुद्दा उठाते हुए विधायक रागिनी ने बताया कि जामाडोबा, झरिया निवासी गुडू सिंह उर्फ संजीत सिंह एक दुर्घटना में घायल हो गए थे, जिन्हें इलाज के लिए असर्फी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
विधायक ने सदन में कहा कि स्वास्थ्य मंत्री स्वयं यह कहते हैं कि किसी मरीज की मृत्यु हो जाने के बाद अस्पताल में किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता और शव को परिजनों को सौंप दिया जाता है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि
जब मंत्री कहते हैं कि मृत्यु के बाद किसी प्रकार का पैसा नहीं लगता, तो फिर असर्फी अस्पताल में परिजनों से पैसे की मांग क्यों की जा रही है? जब तक पैसा नहीं दिया जाता, तब तक शव को नहीं छोड़ा जाता। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?”
रागिनी सिंह ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगते हुए कहा कि अगर ऐसा नियम है तो उसका पालन क्यों नहीं हो रहा है और अगर पालन नहीं हो रहा है तो सरकार ऐसे अस्पतालों के खिलाफ क्या कार्रवाई करेगी।
उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार पहले ही अपनों को खोने के दर्द से गुजरते हैं, ऐसे में अस्पतालों द्वारा शव रोककर पैसे की मांग करना बेहद अमानवीय है। सरकार को इस मामले में सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।



