आर्थिक नाकेबंदी संघवाद पर नंगा हमला:माकपा

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आर्थिक नाकेबंदी संघवाद पर नंगा हमला:माकपा

डीजे न्यूज, रांची: भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार देशहित को ताक पर रखकर  गैर भाजपा शासित राज्यों के साथ केवल भारी भेदभाव ही नहीं कर रही है बल्कि उन्हें आर्थिक रुप से पंगु बनाने के अपने राजनीतिक एजेण्डे को आगे बढ़ाने का काम कर रही है। इसका ताजा उदाहरण केरल है जिसे केन्द्र की नीतियों के कारण अपने राजस्व में उसे पिछले पांच वर्षों में 57 हजार करोड़ रु का भारी घाटा झेलना पड़ा। उक्त बातें माकपा के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने विज्ञप्ति जारी कर कहा। उन्होंने कहा कि उसी प्रकार संवैधानिक प्रावधानों की गलत व्याख्या कर राज्यों के कर्ज लेने की सीमाओं पर कटौतियां थोप दी गई है। केंद्रीय टैक्सों में से केरल का हिस्सा, जो 10 वें वित्त आयोग के दौरान 3.875 प्रतिशत थी, वर्तमान 15 वें वित्त आयोग के समय मात्र 1.925 प्रतिशत रह गयी है। इससे वर्ष 2024-25 में ही केरल को 27 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद केरल की वाम-जनवादी मोर्चा सरकार ने अपने संसाधनों से ही केरल में अत्यंत गरीबी दूर करने का एतिहासिक काम किया है।
झारखंड के साथ भी यही किया जा रहा है। अपने उचित हिस्से के लिए भी मुख्यमंत्री और वित्तमंत्री को दिल्ली जाकर विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों से संपर्क करना पड़ता है।
झारखंड को 15 वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आलोक में मिलने वाले दो वित्तीय वर्ष के बकाये राशि पर केंद्र सरकार कुंडली मार कर बैठी थी जिसका भूगतान नहीं होने से राज्य में वंचित समुदायों के बच्चों की पढ़ाई छात्रवृत्ति नहीं मिलने से वाधित हुई। इसके अलावा पैसे के अभाव में झारखंड के 4 हजार से ज्यादा पंचायतों में विकास का काम ठप्प हो गया। राज्य सरकार के मंत्रियों द्वारा दिल्ली में डेरा डाले जाने के बाद वित्त आयोग की सिफारिश के आधार पर वर्ष 2024 – 25 के लिए प्रथम किश्त की अनुदान राशि 275.13 करोड़ रु वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया गया। उसी प्रकार केंद्र के पास झारखंड का सेस के मद में भारी बकाया पड़ा हुआ है जिसे देने की मांग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बार – बार उठाते रहें हैं।
केंद्र सरकार का राज्यों के साथ यह व्यवहार भारत की संघीय व्यवस्था में देश
मे अवस्थित राज्यों के अधिकारों पर सीधा हमला है। माकपा केंद्रीय सरकार को अगाह करना चाहती है कि गैर भाजपा शासित राज्यों के संविधान सम्मत अधिकारों पर हमला बंद करे और उनके साथ वित्तीय दुर्भावना से बाज आए।

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